अमेरिका में इन दिनों साइक्लोस्पोरा इंफेक्शन का खतरा तेजी से बढ़ रहा है, यह एक आंत की बीमारी है। चलिए जानते हैं यह इंफेक्शन कैसे फैलता है और इसके लक्षण, बचाव के तरीके क्या हैं।
क्या है साइक्लोस्पोरा इंफेक्शन?
शरीर में कैसे पहुंच सकता है ये पैरासाइट
अगर आप कच्चा सलाद लेट्यूस या जड़ी-बूटियां खाते हैं, जिन्हें सही से धोना न गया हो। गंदा पानी पीने या फिर स्वीमिंग पूल का पानी निगलने के कारण भी हो सकता है। गंदे पानी और कच्चे फल-सब्जियों में अक्सर ये पैरासाइट मौजूद होते हैं, जिन्हें धोकर साफ करना जरूरी है। खाने के जरिए ये पैरासाइट शरीर में पहुंच जाते हैं और सीधा आंत में इंफेक्शन पैदा कर देते हैं।
साइक्लोस्पोरा इंफेक्शन के खास लक्षण
-बार-बार पानी जैसे दस्त
-पेट में ऐंठन और दर्द
-मतली (जी मिचलाना)
-भूख कम लगना
-गैस और पेट फूलना
-हल्का बुखार
-थकान और कमजोरी
-वजन कम होना
-शरीर में पानी की कमी
इंफेक्शन होने के हफ्ते भर बाद ही ये लक्षण दिखाई देते हैं। अगर आपको कोई भी लक्षण दिखें, तो उसे साधारण समझकर नजरअंदाज न करें। साइक्लोस्पोरा इंफेक्शन का पता PCR टेस्ट से किया जाता है। बीमारी की पहचान होने पर इलाज आसानी से हो सकता है।
साइक्लोस्पोरा से बचने के लिए क्या करें
फल-सब्जियों को सिर्फ धोना ही काफी नहीं होता। कई बार अच्छी तरह धोने के बाद भी पैरासाइट पत्तेदार सब्जियों पर मौजूद रह सकते हैं और खाने के साथ शरीर में पहुंच सकते हैं। इंफेक्शन के खतरे को कम करने के लिए खाने को कम से कम 70 डिग्री सेल्सियस तक अच्छी तरह पकाकर खाएं। यदि आप लेट्यूस या अन्य पत्तेदार सब्जियां सलाद के रूप में खाते हैं, तो ज्यादा सावधानी बरतें। सबसे बाहरी कुछ पत्तों को हटाकर फेंक दें और बाकी पत्तों को बहते पानी में अच्छी तरह धोने के बाद ही इस्तेमाल करें।
नोट- यह खबर सामान्य जानकारियों पर आधारित है। किसी भी तरह की विशेष जानकारी के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ से उचित सलाह लें।
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