केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) अपनी इवेलुएशन सिस्टम को पूरी तरह सटीक बनाने के लिए लगातार तकनीकी बदलाव कर रहा है। इसी कड़ी में बोर्ड का सबसे बड़ा कदम है कि ‘ऑन स्क्रीन मार्किंग’ सिस्टम। पारंपरिक रूप से लाल पेन से कॉपियां जांचने के दिन अब लद चुके हैं। अब आपके द्वारा परीक्षा हॉल में लिखी गई उत्तर कंप्यूटर स्क्रीन पर जांची जा रही हैं।
आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर यह ‘ऑन स्क्रीन मार्किंग’ फॉर्मूला क्या है, यह कैसे काम करता है और बोर्ड के इस डिजिटल कदम से छात्रों को फायदा हो रहा है या नुकसान।
क्या है ‘ऑन स्क्रीन मार्किंग’ (OSM) फॉर्मूला?
अगर आसान भाषा में कहें तो ‘ऑन स्क्रीन मार्किंग’ उत्तर पुस्तिकाओं के डिजिटल मूल्यांकन की एक तकनीक है। परीक्षा समाप्त होने के बाद, छात्रों की फिजिकल कॉपियों को कड़ी सुरक्षा के बीच क्षेत्रीय केंद्रों पर भेजा जाता है। वहां हाई-स्पीड स्कैनर्स की मदद से हर एक कॉपी के पन्ने-पन्ने को स्कैन करके उसे डिजिटल फॉर्मेट में बदल दिया जाता है। इसके बाद, इन कॉपियों को एक सुरक्षित केंद्रीय सर्वर पर अपलोड कर दिया जाता है।
कॉपियां जांचने वाले शिक्षकों को एक विशिष्ट लॉगिन आईडी और पासवर्ड दिया जाता है। शिक्षक मूल्यांकन केंद्रों पर लगे कंप्यूटर सिस्टम या लैपटॉप पर लॉगिन करके सीधे स्क्रीन पर ही कॉपियां जांचते हैं। उनके पास स्क्रीन पर ही टिक करने, नंबर देने और रिमार्क लिखने के लिए डिजिटल टूल्स होते हैं।
स्कैनिंग से लेकर फाइनल रिजल्ट तक कैसे काम करता है यह सिस्टम?
छात्रों को फायदा या फिर नुकसान?
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