भारत को परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में मिली कामयाबी ने ना केवल पश्चिमी देशों को हैरान किया बल्कि हमारे पड़ोसी मुल्क चीन को भी तारीफ करने पर मजबूर कर दिया। तमिलनाडु के कलपक्कम में भारत के स्वदेशी प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने क्रिटिकिटी हासिल कर ली। यह कामयाबी इतनी बड़ी है कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के प्रमुख ने इसे दुनिया के लिए एक मिसाल बताया और सबसे बड़ी बात चीन की मीडिया ने भी भारत की इस सफलता को अपने यहां प्रमुखता से जगह दी। दरअसल अक्सर भारतीय उपलब्धियों पर खामोश रहने वाली चीन की सरकारी न्यूज़ एजेंसी शिन्हुआ ने इस बार भारत की सफलता को प्रमुखता से जगह दी। शिन्हुआ ने अपने रिपोर्ट में लिखा कि भारत ने अपने परमाणु कार्यक्रम में एक मील का पत्थर छू लिया है। भारत का सबसे उन्नत और स्वदेशी तकनीक से डिजाइन किया गया रिएक्टर अब पूरी तरह सक्रिय होने की स्थिति में आ गया है। चीनी मीडिया ने माना कि भारत अब अपने तीन चरणों वाले परमाणु कार्यक्रम के दूसरे और सबसे महत्वपूर्ण चरण में सफलतापूर्वक प्रवेश कर चुका है।
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कहीं ना कहीं चीन के लिए भी एक बड़ा संकेत कि परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भारत अब आत्मनिर्भरता की उस दहलीज पर खड़ा है जहां उसे हराना मुश्किल होगा और सिर्फ चीन ही नहीं भारत की इस सफलता पर पूरी दुनिया में परमाणु सुरक्षा की निगरानी करने वाली संस्था आईएईए के प्रमुख राफेल मैरियानी ग्रोसी ने भारत की इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर की। उन्होंने इस सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर प्रधानमंत्री मोदी को बधाई देते हुए कहा कि यह रिएक्टर भारत के उज्जवल और स्वच्छ ऊर्जा के भविष्य के लिए एक बड़ा संकेत है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आईएईए भारत के परमाणु कार्यक्रम को और सुरक्षित और मजबूत बनाने के लिए कंधे से कंधा मिलाकर काम करता रहेगा। कुल मिलाकर देखा जाए तो भारत की सफलता पर इस वक्त पूरी दुनिया की नजर है।
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आपको यहां पर यह भी बता दें कि भारत ने जो क्रिटिकिटी हासिल की है वो स्थिति है जब रिएक्टर के भीतर परमाणु फज़न की प्रक्रिया अपने आप चलने लगती है और स्थिर हो जाती है। यानी अब यह रिएक्टर बिजली पैदा करने के लिए तैयार है। आसान भाषा में समझा जाए तो यह रिएक्टर अपने आप लगातार चलने वाली परमाणु प्रक्रिया को संभाल सकता है। यानी यह सिर्फ ऊर्जा ही नहीं बनाएगा बल्कि जितना ईंधन इस्तेमाल करेगा उससे ज़्यादा नया ईंधन भी तैयार कर सकेगा और यही इसकी सबसे बड़ी खासियत है। असल में यह पूरा प्रोजेक्ट भारत की तीन स्टेज वाली परमाणु योजना का अहम हिस्सा है। भारत के पास थोरियम का बड़ा भंडार है लेकिन उसे सीधा इस्तेमाल करना आसान नहीं होता।
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