1975 और 1979 में वनडे विश्व कप जीतने वाली वेस्टइंडीज की हालत अब ऐसी हो गई है कि वह लगातार तीसरी बार वनडे वर्ल्ड कप में सीधे क्वालीफाई नहीं कर सकी है। उसे विश्व कप 2027 में हिस्सा लेने के लिए अब क्वालीफिकेशन राउंड खेलना होगा।
वेस्ट इंडीज के लिए खत्म हो गई हैं स्वत: क्वालीफिकेशन की संभावनाएं
वेस्ट इंडीज मौजूदा वनडे रैंकिंग में 10वें स्थान पर है। आईसीसी वनडे विश्व कप के लिए आईसीसी का यह रूल है कि मेजबान टीम को छोड़कर, वनडे रैंकिंग में शीर्ष आठ में शामिल पूर्ण सदस्य टीमें विश्व कप के लिए स्वतः क्वालीफाई कर जाती हैं। 2027 का वनडे विश्व कप दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया की संयुक्त मेजबानी में खेला जा रहा है। दक्षिण अफ्रीका शीर्ष आठ में एकमात्र मेजबान टीम है, जबकि जिम्बाब्वे 11वें स्थान पर है। इसका मतलब यह है कि नौवें स्थान पर मौजूद बांग्लादेश को भी स्वतः क्वालीफाई करने का मौका मिल सकता है, जबकि 10वें स्थान पर मौजूद वेस्ट इंडीज प्रतियोगिता से बाहर हो गई है। वेस्टइंडीज को विश्व कप 2027 में क्वालीफाई करने के लिए चाहिए था कि आयरलैंड की टीम अफगानिस्तान को 5-0 या 4-1 से हरा दे साथ ही वेस्टइंडीज भारत के खिलाफ दो मैचों की वनडे सीरीज को 2-0 से जीत ले। हालांकि, ऐसा होता नहीं दिख रहा है। पहला वनडे बारिश के कारण रद्द हो गया और दूसरा अफगानिस्तान ने जीत लिया है, जिसका मतलब है कि आयरलैंड सीरीज तभी 3-1 से जीत सकता है जब वह बचे हुए सभी मैच जीत ले। इसका मतलब यह है कि भारत के खिलाफ 2-0 की जीत वेस्ट इंडीज के लिए आईसीसी रैंकिंग के शीर्ष नौ में जगह बनाने के लिए काफी नहीं होगी। वेस्ट इंडीज ने आखिरी बार भारत के खिलाफ द्विपक्षीय वनडे सीरीज 2006 में जीती थी और भारत में उनकी आखिरी द्विपक्षीय वनडे सीरीज जीत 2002 में हुई थी। इन आंकड़ों को देखकर यह भी नहीं लगता कि वेस्टइंडीज भारत को 2-0 से शिकस्त दे सकेगी।
दो बार की विश्व चैंपियन की साख पर उठ रहे सवाल
बता दें कि वेस्ट इंडीज ने 1975 और 1979 में टूर्नामेंट के पहले दो संस्करण जीते थे और 1983 में भी जीत के प्रबल दावेदार थे, लेकिन फाइनल में उन्हें कपिलदेव की कप्तानी वाली भारतीय टीम ने करारी शिकस्त दी थी। भारत और ऑस्ट्रेलिया के साथ वेस्ट इंडीज उन तीन टीमों में से एक है जिन्होंने टूर्नामेंट को एक से अधिक बार जीता है। भारत ने भी इसे दो बार जीता है, जबकि ऑस्ट्रेलिया ने इसे छह बार जीता है। वेस्टइंडीज की पिछले दो दशकों में हुई स्थिति से उनके क्रिकेट की साख पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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