अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम में अनिवार्य रूप से शामिल होने के पश्चिम बंगाल सरकार के फैसले के खिलाफ सरकारी कर्मचारी गुरुवार (18 जून, 2026) को कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंचे. सुनवाई के दौरान जस्टिस अमृता सिन्हा ने कर्मचारियों की दलीलों पर चुटकी लेते हुए कहा कि आपको वैलेंटाइन डे का भी जिक्र करना चाहिए था.
याचिकाकर्ता के वकील विकास रंजन भट्टाचार्य ने दलील दी कि भाषा दिवस, महिला दिवस, मातृ दिवस और मानवाधिकार दिवस जैसे कई अंतरराष्ट्रीय दिवस भी हैं. इस पर जस्टिस सिन्हा ने चुटकी लेते हुए कहा, ‘आप क्यों रुक गए? आपको वैलेंटाइन डे का भी जिक्र करना चाहिए था.’ इस पर कोर्टरूम में ठहाके गूंज उठे. इसके बाद, एडवोकेट भट्टाचार्य ने भी मजाक में जवाब दिया कि वह उस खास दिन को भूल गए थे.
योग कार्यक्रम में शामिल होने के विरोध में दी गईं दलीलों पर हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि यह कार्यक्रम लोगों की सेहत से जुड़ा हुआ है और सरकार नहीं चाहेगी कि उसके कर्मचारी अस्वस्थ रहें. अदालत ने कहा कि मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार को होगी, जब राज्य सरकार के वकील इस मुद्दे पर सरकार का लिखित निर्देश पेश करेंगे.
‘वेस्ट बंगाल गवर्नमेंट इम्पलॉयीज’ की राज्य समन्वय समिति ने यह याचिका दाखिल की है. याचिका में राज्य सरकार के मुख्य सचिव के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें सभी कर्मचारियों के लिए योग कार्यक्रम में शामिल होना अनिवार्य किया गया है. कर्मचारी संगठन ने आदेश जारी करने के मुख्य सचिव के अधिकार पर सवाल उठाया.
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एडवोकेट विकास रंजन भट्टाचार्य ने कहा कि मुख्य सचिव ने राज्य सरकार के सभी कर्मचारियों को 21 जून को होने वाले कार्यक्रम में जरूर शामिल होने का निर्देश दिया है, जिसमें स्थाई और अस्थाई सभी कर्मचारी शामिल हैं. अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के लिए ‘योग संगम’ पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन को लेकर राज्य के मुख्य सचिव के एक पत्र का हवाला देते हुए, उन्होंने कोर्ट में कहा कि वह यह निर्देश जारी करने के मुख्य सचिव के मौलिक अधिकार क्षेत्र को चुनौती दे रहे हैं.
पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से एडिशनल एडवोकेट जनरल (AAG) बिलवादल भट्टाचार्य ने दलील दी कि यह कार्यक्रम संयुक्त राष्ट्र महासभा का है, जिसका नेतृत्व भारत कोलकाता से कर रहा है और इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी भागीदारी होगी.
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