हमारा गणित अलग है। एक तेल कुआ = चार तेल कुएं। इस बयान ने यह संकेत दे दिया है कि ईरान अब केवल बचाव की नहीं बल्कि आक्रामक जवाबी कारवाई की रणनीति पर काम कर रहा है।
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इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप ने भी तेहरान को चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर ईरान युद्ध विराम समझौते को स्वीकार नहीं करता तो अमेरिका उसकी तेल पाइप लाइनों को निशाना बना सकता है। उन्होंने यह तक कहा कि ईरान की तेल व्यवस्था प्राकृतिक और तकनीकी कारणों से भी ध्वस्त हो सकती है। जिसे कई विशेषज्ञों ने परोक्ष धमकी के रूप में देखा। राजनायक मोर्चे पर भी स्थिति ठहरी हुई नजर आ रही है। अब्बास अरागची रूस के सेंट पीटर्सबर्ग पहुंच चुके हैं। जहां उनकी मुलाकात व्लादमीर पुतिन से प्रस्तावित है। इससे पहले वे पाकिस्तान और ओमान का दौरा कर चुके हैं। लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है। इसी बीच ईरान ने पाकिस्तान की मध्यस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। ईरानी संसद के प्रवक्ता इब्राहिम रजाई ने कहा कि पाकिस्तान निष्पक्ष मध्यस्थ की भूमिका निभाने में सक्षम नहीं है और वह अक्सर अमेरिकी हितों के अनुरूप काम करता है। ईरान को ऐसे मध्यस्थ की जरूरत है जो दोनों पक्षों के सामने सच्चाई रखने का साहस रखता हो। दूसरी तरफ क्षेत्रीय तनाव सिर्फ अमेरिका ईरान तक सीमित नहीं है। इजराइल और हिजबुल्ला के बीच भी हालात बिगड़ते दिख रहे हैं। दोनों पक्ष एक दूसरे पर युद्ध विराम उल्लंघन के आरोप लगा रहे हैं। इजराइल ने दक्षिणी लेबनान में अपने एक सैनिक की मौत की पुष्टि की। जबकि हिजबुल्ला का कहना है कि उसकी कारवाई इजराइल के लगातार हमलों का जवाब थी।
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कुल मिलाकर भले ही युद्ध विराम कागजों पर लागू हो लेकिन जमीनी हकीकत यही है कि तनाव चरम पर बना हुआ है। ईरान ने साफ संदेश दिया है कि जो भी देश अमेरिका का साथ देगा वह उसका दुश्मन माना जाएगा। ऐसे में खाली क्षेत्र में अस्थिरता और बड़े संघर्ष की आशंका फिर से गहराती हुई नजर आ रही है। [संगीत] धुआंधार और सस्ती ईरानी मिसाइलें जिन्हें बड़े ही प्यार से सोशल मीडिया पर लोग मछली, सांप और न जाने कौन-कौन से नामों से बुलाते हैं। अब उसे लेकर बड़ा कबूलनामा आया है जिसने दुनिया भर को हैरान करके रख दिया है। क्योंकि जिस हथियार को कई लोग हल्के में ले रहे थे वही अब एक बड़े देश की सबसे बड़ी कमजोरी बनता हुआ नजर आ रहा है। एज अ रिपोर्ट्स में खुलासा हुआ है कि ईरान के मिसाइल ताकत ने इजराइल की रक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है और यह कोई सामान्य दावा नहीं बल्कि इजराइल के ही रक्षा तंत्र से जुड़े अधिकारियों के हवाले से सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि इजराइल के पास इंटरसेप्टर मिसाइलों की भारी कमी हो चुकी है। यानी जितनी तेजी से ईरान मिसाइलें बना रहा है, उतनी तेजी से इजराइल उन्हें रोक नहीं पा रहा। दावा यह भी है कि जहां इजराइल एक इंटरसेप्टर तैयार करता है, वहीं ईरान करीब 10 बैलस्टिक मिसाइलें बना देता है।
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