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- Warren Buffett Steps Down As Berkshire Hathaway Chairman | Howard Buffett
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अमेरिकी निवेशक वॉरेन बफेट ने बर्कशायर हैथवे के चेयरमैन पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया है। कंपनी ने शुक्रवार, 18 सितंबर को बताया कि 96 साल के बफेट अब मानद चेयरमैन यानी चेयरमैन एमेरिटस की भूमिका निभाएंगे। वह कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में भी बने रहेंगे।
कंपनी के लंबे समय से तय उत्तराधिकार योजना यानी सक्सेशन प्लान के तहत बोर्ड ने वॉरेन बफेट के बेटे हॉवर्ड बफेट को नया चेयरमैन चुना है। वहीं ग्रेग एबेल चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर और सुजैन डेकर लीड इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के पद पर बने रहेंगे।

वॉरेन बफेट ने 31 दिसंबर को बर्कशायर हैथवे के CEO पद से इस्तीफा दिया था।
वॉरेन के योगदान की तुलना नहीं की जा सकती
बर्कशायर बोर्ड की ओर से सीईओ ग्रेग एबेल ने कहा कि अमेरिकी बिजनेस के इतिहास में बर्कशायर और इसके शेयरहोल्डर्स पर वॉरेन के योगदान की कोई तुलना नहीं की जा सकती।
एबेल ने आगे कहा कि वॉरेन के बनाए गए कल्चर और वैल्यू कंपनी के फोकस में बने रहेंगे और हॉवर्ड बफेट इसे आगे बढ़ाने का काम करेंगे।
हॉवर्ड बफेट 1993 से बर्कशायर के बोर्ड में शामिल हैं
71 साल के हॉवर्ड बफेट 1993 से बर्कशायर के बोर्ड में डायरेक्टर के तौर पर शामिल हैं। वे 1999 से हॉवर्ड जी बफेट फाउंडेशन को लीड कर रहे हैं, जो ग्लोबल फूड सिक्योरिटी एंड कनफ्लिक्ट रेजोल्यूशन पर काम करता है।
हॉवर्ड कई पब्लिक और प्राइवेट कंपनियों के बोर्ड में रह चुके हैं और करीब एक दशक तक यूनाइटेड नेशन वर्ल्ड फूड प्रोग्राम के गुडविल एम्बेसडर अगेंस्ट हंगर भी रहे हैं।

व्हील चेयर पर वॉरेन बफेट और उनके साथ बेटे हॉवर्ड बफेट। (फाइल फोटो)
वॉरेन बफेट ने 9 महीने पहले CEO पद से इस्तीफा दिया था
इससे पहले वॉरेन बफेट ने 31 दिसंबर को बर्कशायर हैथवे के CEO पद से इस्तीफा दिया था। बफे की जगह ग्रेग एबेल नए CEO बनाए गए थे। बफेट जिस कंपनी के दम पर दुनिया के 10वें सबसे अमीर इंसान बने, उसे खरीदना ही वे अपनी जिंदगी की ‘सबसे बड़ी गलती’ मानते हैं।
बफेट ने यह कंपनी किसी बिजनेस डील के लिए नहीं, बल्कि गुस्से में आकर खरीदी थी। वहीं एक बार रिटायरमेंट पर बफेट ने कहा था कि इस बारे में सोचना भी नामुमकिन है। मेरे लिए यह मौत से भी बदतर होगा।
डूबती कपड़ा मिल से बनाई 98 लाख करोड़ रुपए की कंपनी
1965 में जब वॉरेन बफेट ने बर्कशायर हैथवे का कंट्रोल हाथ में लिया था, तब यह एक संघर्ष कर रही टेक्सटाइल कंपनी थी। बफेट ने इसे दुनिया के सबसे बड़ी कंपनियों में से एक में बदल दिया। आज बर्कशायर हैथवे 1.09 ट्रिलियन डॉलर यानी, करीब 98 लाख करोड़ रुपए की वैल्यू वाली कंपनी है।
इसके पास कोका-कोला, क्राफ्ट हेंज और एपल जैसे बड़े ब्रांड्स की हिस्सेदारी है, साथ ही जीको (Geico) और नेटजेट्स जैसी कंपनियां भी इसके पोर्टफोलियो में शामिल हैं।

फोर्ब्स की रियल टाइम बिलियनेयर्स लिस्ट के अनुसार, वॉरेन बफेट की नेटवर्थ 13.82 लाख करोड़ रुपए है। दुनिया के टॉप-10 अमीरों में वे 10वें नंबर पर आते हैं।
बफेट ने कहा था- बर्कशायर खरीदना सबसे बड़ी गलती थी
हैरानी की बात यह है कि जिस कंपनी के दम पर बफेट दुनिया के टॉप-10 अमीरों में शामिल हुए, उसे ही वे अपनी सबसे बड़ी गलती मानते हैं। बफेट के मुताबिक, उन्होंने 1962 में सिर्फ इसलिए इस कंपनी को खरीदा था क्योंकि इसके मैनेजमेंट ने उन्हें धोखा दिया था।
बफेट बताते हैं- 1964 में बर्कशायर के मालिक मिस्टर स्टैंटन ने वादा किया था कि उनके पास बर्कशायर के जितने भी स्टॉक है उसे वो 11.50 डॉलर के भाव पर खरीद लेंगे।
कुछ दिनों बाद जब लेटर आया तो कीमत 11.375 डॉलर थी। यानी, जितने प्राइस में बात हुई थी उससे 12 सेंट कम। इस धोखाधड़ी से बफेट को इतना गुस्सा आया कि उन्होंने स्टॉक बेचने के बजाय पूरी कंपनी ही खरीद ली और स्टैंटन को नौकरी से निकाल दिया।
बफेट इसे अपनी ‘सबसे डंब’ (बेवकूफी भरी) डील मानते हैं, क्योंकि उन्होंने एक डूबते हुए टेक्सटाइल बिजनेस में सालों तक अपना पैसा फंसाए रखा। बफेटट कहते हैं, “अगर मैं वह पैसा सीधे इंश्योरेंस बिजनेस में लगाता, तो आज बर्कशायर की वैल्यू दोगुनी होती।”

1960 के दशक की बर्कशायर हैथवे की पुरानी टेक्सटाइल मिल। यहीं से शुरू हुई बफेट की वो यात्रा, जिसे वे आज अपनी सबसे बड़ी गलती मानते हैं।
बफेट के वो सबक, जिसे दुनिया के CEOs ने अपनाया
वॉरेन बफेट सिर्फ एक निवेशक नहीं, बल्कि एक महान शिक्षक भी रहे हैं। बफेट ने अपनी सलाह से भरे ‘इन्वेस्टर लेटर्स’, घंटों चलने वाली मीटिंग्स और अपने काम व निजी जीवन के फैसलों के जरिए दुनिया भर के CEO’s को सिखाया है कि बिजनेस और जिंदगी कैसे चलाई जाती है।
- सीईओ के बीच बफेट के जिस गुण की सबसे ज्यादा चर्चा हुई, वो है उनका धैर्य। बफेट बर्कशायर में कैश का ढेर लगाकर बैठ जाते थे और निवेश के सही मौके का इंतजार करते थे। उन्होंने 1989 में शेयरधारकों को लिखा था, “पसंदीदा होल्डिंग पीरियड हमेशा के लिए है।”
- कायाक के CEO स्टीव हाफनर कहते हैं, “मैं वॉरेन बफेट की इस बात का कायल रहा हूं कि वे मुश्किल बातों को समझाने के लिए कितनी आसान भाषा का इस्तेमाल करते हैं। किसी जटिल मुद्दे को बिल्कुल बेसिक लेवल पर ले जाना बहुत बड़े हुनर का काम है।”
- वेल्थ मैनेजमेंट फर्म हाइटावर के CEO लैरी रेस्टिएरी ने कहा– “बफेट से मैंने सीखा कि एक्सीलेंस सच में एक डिसिप्लिन है। साफ दिशा तय करें और धैर्य से अमल करें।”
बफेट के 5 गोल्डन रूल्स
- लालच पर कंट्रोल: “जब दूसरे लालची हों तो आप डरिए, और जब दूसरे डरे हुए हों तभी आप लालची बनिए।”
- वक्त की ताकत: “आज कोई पेड़ की छांव में बैठा है, क्योंकि किसी ने बहुत समय पहले वहां पौधा लगाया था।”
- बिजनेस की समझ: “कभी भी उस बिजनेस में पैसा न लगाएं जिसे आप समझ नहीं सकते।”
- कीमत vs वैल्यू: “कीमत वह है जो आप चुकाते हैं, वैल्यू वह है जो आप पाते हैं।”
- साख की कीमत: “इज्जत बनाने में 20 साल लगते हैं और उसे गंवाने में सिर्फ 5 मिनट। अगर आप यह याद रखेंगे, तो चीजें अलग तरह से करेंगे।”
क्या होता है चेयरमैन एमेरिटस?
यह एक सम्मानजनक पदवी है जो किसी कंपनी के पूर्व चेयरमैन या फाउंडर को उनके असाधारण योगदान के लिए दी जाती है। इस भूमिका में व्यक्ति के पास कार्यकारी यानी एग्जीक्यूटिव अधिकार नहीं होते, लेकिन वह कंपनी की बैठकों में शामिल होकर मार्गदर्शन दे सकता है।
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