हालांकि, वीडियो वायरल होने के बाद सौरव जोशी ने अपने व्लॉग से इस हिस्से को हटा दिया। सौरव जोशी के वीडियो ने E20 पेट्रोल पर लंबे समय से चली आ रही चिंताओं को फिर से हवा दे दी है। एक तरफ सरकार का तर्क है कि यह राष्ट्रीय हित में है, तेल आयात कम होगा, किसान खुश होंगे और प्रदूषण घटेगा। दूसरी तरफ उपभोक्ता कह रहे हैं कि उनकी जेब और गाड़ी पर असर पड़ रहा है।
सौरव जोशी का दावा क्या है?
सौरव जोशी ने अपने व्लॉग में दावा किया कि उनकी मर्सिडीज-बेंज GLC 300 पहले 16-17 kmpl माइलेज देती थी। E20 इस्तेमाल करने के बाद यह गिरकर 9 kmpl और फिर 5 kmpl पर आ गई। फुल टैंक की रेंज पहले 800 Km के करीब थी, अब 480 Km रह गई। वे कहते हैं कि “कार खराब होने का डर लग रहा है और अब पेट्रोल भराने में डर लगता है।” कंपनी के अनुसार मर्सिडीज GLC 300 का क्लेम्ड माइलेज करीब 14-15 kmpl के आसपास है।
सरकार का दावा
सरकार का दावा है कि इससे किसानों की आय बढ़ेगी, प्रदूषण कम होगा और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करना। भारत ने दिसंबर 2025 तक 20% ब्लेंडिंग का टारगेट हासिल कर लिया, जो 2030 के मूल लक्ष्य से 5 साल पहले था। अप्रैल 2026 से पूरे देश में E20 स्टैंडर्ड फ्यूल बन गया है। शुद्ध पेट्रोल (E0) या E10 का विकल्प फिलहाल ज्यादातर जगहों पर उपलब्ध नहीं है। सरकार के अनुसार, E20 से विदेशी मुद्रा की बचत हुई है और पर्यावरण को फायदा हुआ है।
E20 पेट्रोल क्या है?
E20 का मतलब है 20% इथेनॉल मिला हुआ पेट्रोल, यानी 80% पेट्रोल और 20% इथेनॉल। इथेनॉल मुख्य रूप से गन्ना, मक्का और अन्य फसलों से बनाया जाता है। भारत सरकार की नेशनल पॉलिसी ऑन बायोफ्यूल्स 2018 (2022 में संशोधित) के तहत यह कार्यक्रम चल रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना है। भारत करीब 85% से ज्यादा तेल आयात करता है।
मर्सिडीज-बेंज की ग्राहक सलाह
वीडियो वायरल होने के बाद मर्सिडीज-बेंज ने अपने ग्राहकों के लिए एक अपडेट जारी किया है। मर्सिडीज इंडिया ने कहा कि उसके सभी पेट्रोल BS VI वाहन E20 ईंधन के साथ कम्पैटिबल हैं। कंपनी ने ग्राहकों को आश्वासन दिया है कि यदि किसी भी वाहन मालिक को E20 ईंधन से संबंधित कोई तकनीकी सवाल या शंका हो तो वे मर्सिडीज-बेंज की टीम से संपर्क कर सकते हैं। कंपनी ग्राहकों को हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए तैयार है।
उपभोक्ताओं की चिंताएं
सोशल मीडिया पर कई कार मालिक, खासकर पुरानी गाड़ियों वाले माइलेज में काफी गिरावट और इंजन संबंधी समस्याओं की शिकायत कर रहे हैं। इथेनॉल पानी सोखता है (हाइग्रोस्कोपिक), जिससे पुराने इंजनों में जंग, सील खराब होने और फ्यूल सिस्टम की शिकायत आ रही है। कोई विकल्प न होने से मजबूरी में E20 इस्तेमाल करना पड़ रहा है।
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