स्विजटरलैंड के फॉरवर्ड ब्रील एम्बोलो को अर्जेंटीना के खिलाफ विश्व कप क्वार्टर फाइनल मैच के दूसरे हाफ में वीडियो रिव्यू के बाद रेडकार्ड दिखाये जाने के फैसले पर विवाद हो गया है और यह तो तय है कि इससे पूरे टूर्नामेंट में रैफरियों द्वारा अर्जेंटीना का पक्ष लिये जाने की आलोचना करने वाले और मुखर हो जायेंगे।
स्विटजरलैंड के लिये डैन एनडोये ने 67वें मिनट में बराबरी का गोल दागा। इसके बाद अर्जेंटीना के मिडफील्डर लिएंड्रो पेरेडेस को एम्बोलो से टकराने के कारण येलो कार्ड दिखाया गया लेकिन वीडियो रिव्यू में नजर आया कि पेरेडेस से टकराने से पहले ही एम्बोलो गिर रहे थे।
एम्बोलो को मैच में पहले येलो कार्ड मिल चुका था जिसकी वजह से उन्हें रेडकार्ड दिया गया।
मैच 1 . 1 से बराबर होने के बाद स्विटजरलैंड को दस खिलाड़ियों के साथ ही खेलना पड़ा। अर्जेंटीना ने अतिरिक्त समय में दो गोल करके उसे 3 . 1 से हराया।
इस विश्व कप में दूसरी बार येलो कार्ड का फैसला बदला गया। नियमों के अनुसार अगर गलत खिलाड़ी को येलो या रेड कार्ड दिखाया जाता है तो वीडियो सहायता रैफरी दखल दे सकता है।
स्विटजरलैंड के कोच मुरात याकिन ने कहा ,‘‘ हमें एक नियम का खामियाजा भुगतना पड़ा जो मेरी राय में पूरी तरह से अस्वीकार्य है। इस तरह से बाहर होना दुखद है। मुझे नहीं लगता कि हमारे साथ ऐसा होना चाहिये था। मेरी टीम ने पूरी लगन और जुनून के साथ खेला और मुझे उस पर गर्व है।’’
उन्होंने पुर्तगाल के रैफरी जोओ पिन्हेइरो की आलोचना करते हुए कहा ,‘‘ रैफरी ने गलत फैसला लिया। यह सजा लायक गलती नहीं थी। मुझे पता है कि वे अपने रैफरी का बचाव करेंगे लेकिन इस नियम ने आज हमारा खेल बर्बाद कर दिया। यह काफी दर्दनाक है कि हम इस तरह से बाहर हुए।’’
अर्जेंटीना के कोच लियोनेल स्कालोनी ने स्वीकार किया कि किस्मत ने उनका साथ दिया क्योंकि स्विटजरलैंड का एक खिलाड़ी बाहर था।
स्विस कप्तान ग्रैनिट जाका ने कहा ,‘‘ रेडकार्ड ने मैच का परिणाम बदल दिया। इस फैसले को स्वीकार कर पाना मुश्किल है।’’
इससे पहले अंतिम 16 के दौर में अर्जेंटीना से 2 . 3 से मिली हार के बाद मिस्र फुटबॉल संघ ने कहा था कि वे खामोश नहीं बैठेंगे।
मिस्र के कोच होसाम हसन और कई खिलाड़ियों ने रैफरिंग की आलोचना की थी। मैच में 79वें मिनट में दो गोल से पिछड़ने के बाद अर्जेंटीना ने 13 मिनट के भीतर तीन गोल किये थे।
फीफा के रैफरिंग प्रमुख पीयरलुइगी कोलिना ने बुधवार को कहा था ,‘‘ फीफा विश्व कप मैच अधिकारियों की ईमानदारी पर कोई शक नहीं कर सकता। ऐसी कोई घटना होने पर उनको और उनके परिवार को धमकियां दी जाती हैं जो सही नहीं हैं।
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