महिलाओं की उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना को मंजूरी दे दी गई है।
पहले साल 50 हजार छात्राओं को मिलेगा लाभ
इस योजना के पहले साल में करीब 50,000 छात्राओं को इसका लाभ मिलने की उम्मीद है। सरकार का उद्देश्य छात्राओं के सामने आने वाली आवागमन की समस्याओं को दूर करना और उन्हें उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करना है। यह जानकारी उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने दी है।
किन छात्राओं को मिलेगा योजना का लाभ?
बता दें कि रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना का लाभ राज्य और निजी विश्वविद्यालयों, राज्य विश्वविद्यालयों से संबद्ध सरकारी कॉलेजों, अनुदानित संस्थानों और सेल्फ-फाइनेंस कॉलेजों में पढ़ने वाली छात्राओं को मिलेगा। योजना के लिए पात्रता शैक्षणिक प्रदर्शन के आधार पर तय की जाएगी। शैक्षणिक सत्र 2025-26 में परीक्षा उत्तीर्ण करने वाली प्रत्येक संस्थान की स्नातक (UG) की शीर्ष 5% मेधावी छात्राओं को इस योजना का लाभ दिया जाएगा। इससे प्रदेश की प्रतिभाशाली छात्राओं को उच्च शिक्षा जारी रखने में सहायता मिलेगी।
योजना के लिए पात्र
रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक के परिवार की वार्षिक आय 12 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। इसके साथ ही लाभार्थी के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस होना भी अनिवार्य होगा। हालांकि, शहीदों की बेटियां, निराश्रित (Destitute) परिवारों की छात्राएं और दिव्यांग छात्राएं मेरिट की शर्त पूरी न होने पर भी इस योजना का लाभ पाने की पात्र होंगी।
क्या-क्या मिलेगा?
योजना के तहत सरकार सिर्फ मुफ्त स्कूटी ही नहीं देगी, बल्कि वाहन का रजिस्ट्रेशन और बीमा (Insurance) का पूरा खर्च भी उठाएगी।
इसके अलावा प्रत्येक लाभार्थी छात्रा को एक हेलमेट, स्कूटी के जरूरी एक्सेसरीज, 5 लीटर पेट्रोल भी मुफ्त दिया जाएगा।
कैसी होगी स्कूटी?
उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि सरकार ने पेट्रोल से चलने वाली स्कूटी देने का फैसला किया है। इसकी वजह यह है कि उत्तर प्रदेश में पेट्रोल पंप और सर्विस सेंटर आसानी से उपलब्ध हैं, जिससे छात्राओं को रखरखाव में किसी तरह की परेशानी नहीं होगी। स्कूटियों की खरीद पारदर्शी ऑनलाइन खरीद प्रक्रिया के जरिए एक विशेष पोर्टल पर की जाएगी।
योजना का उद्देश्य
सरकार का मानना है कि इस योजना से छात्राओं के लिए कॉलेज आने-जाने का सफर अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक होगा। इससे उच्च शिक्षा में लड़कियों की भागीदारी बढ़ेगी, उनकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा और महिला सशक्तिकरण को भी मजबूती मिलेगी।
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