ईरान में सोमवार (23 फरवरी 2026) को हजारों लोगों के मोबाइल फोन पर एक अज्ञात नंबर से फारसी भाषा में एक मैसेज मिला, जिसमें लिखा था, ‘अमेरिकी राष्ट्रपति एक्शन लेने वाले व्यक्ति हैं. इंतज़ार कीजिए और देखिए.’ ईरान इंटरनेशनल न्यूज एजेंसी ने सरकारी मीडिया के हवाले से यह जानकारी दी. यह घटनाक्रम ऐसे वक्त में हुआ है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान शासन के खिलाफ बयानबाज़ी तेज कर दी है और मध्य पूर्व में संभावित सैन्य कार्रवाई के मद्देनजर बड़े पैमाने पर सैन्य तैनाती की है.
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि वह ईरान पर सैन्य हमला करने पर विचार कर रहे हैं. हालांकि, दोनों देशों के बीच जिनेवा में गुरुवार (26 फरवरी 2026) को मुद्दे से संबंधित अगली बातचीत होनी है. AFP की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रविवार (23 फरवरी 2026) को CBS से कहा कि परमाणु कार्यक्रम को लेकर किसी भी तरह की रोक-टोक बर्दाशत नहीं की जाएगी. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिकी सैन्य दबाव के आगे तेहरान झुकेगा नहीं. इसी बीच, लेबनान में अमेरिकी दूतावास ने संभावित क्षेत्रीय घटनाक्रम को देखते हुए एहतियातन दर्जनों कर्मचारियों को हटा लिया है.
ईरान की अमेरिका को चेतावनी
ईरान ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि किसी भी हमले का जवाब दिया जाएगा. तेहरान का कहना है कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम पर एक समझौते का मसौदा तैयार कर रहा है और जल्द ही मध्यस्थों को प्रस्ताव सौंपेगा. ईरान का दावा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल नागरिक उपयोग के लिए है, जबकि पश्चिमी देश इसे परमाणु हथियार निर्माण की दिशा में कदम मानते हैं.
ईरान में फैला आंतरिक विरोध और असंतोष
ईरान में छात्रों ने इस्लामी शासन के खिलाफ नए सिरे से प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं. विश्वविद्यालयों में नए सत्र की शुरुआत के साथ सरकार विरोधी नारे लगाए गए. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में तेहरान के एक विश्वविद्यालय में छात्रों को 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद अपनाए गए झंडे को जलाते हुए देखा गया. प्रदर्शनकारियों ने इस्लामिक रिपब्लिक मुर्दाबाद जैसे नारे लगाए. इससे पहले जनवरी में चरम पर पहुंचे प्रदर्शनों को सुरक्षा बलों ने हिंसक कार्रवाई के जरिए दबा दिया था. अमेरिकी मानवाधिकार संगठन HRANA के अनुसार, इन प्रदर्शनों में 7,000 से अधिक लोगों की मौत हुई, हालांकि ईरानी सरकार करीब 3,000 मौतों की पुष्टि करती है और हिंसा के लिए विदेशी ताकतों को जिम्मेदार ठहराती है.
क्यों दुनिया के लिए टेंशन बने ईरान-अमेरिका
संभावित अमेरिका-ईरान युद्ध की आशंकाओं के बीच कई देशों ने अपने नागरिकों को ईरान छोड़ने की सलाह दी है. भारत ने भी सोमवार को स्वीडन, सर्बिया, पोलैंड और ऑस्ट्रेलिया के साथ अपने नागरिकों को सतर्क रहने और देश छोड़ने पर विचार करने की सलाह जारी की. यूरोपीय संघ ने भी वार्ता से पहले कूटनीतिक समाधान की अपील की है. ईयू की विदेश नीति प्रमुख काजा कैलास ने कहा, ‘हमें इस क्षेत्र में एक और युद्ध की जरूरत नहीं है. यह कूटनीतिक समाधान खोजने का समय है.’
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