उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के छोटे से गांव दरियापुर जका की रहने वाली नाबिया परवेज ने अपनी मेहनत और लगन से एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 29 प्राप्त कर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे जिले और अपनी झोझा बिरादरी का मान बढ़ाया है. उनकी सफलता को इलाके के लोग एक बड़ी प्रेरणा के रूप में देख रहे हैं.
नाबिया परवेज साधारण परिवार से ताल्लुक रखती हैं. उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई पूरी करने के बाद उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली का रुख किया. पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने सिविल सेवा में जाने का लक्ष्य तय कर लिया था. सीमित संसाधनों और कठिन कम्पटीशन के बावजूद उन्होंने लगातार मेहनत जारी रखी और अंत में UPSC जैसी कठिन परीक्षा में शानदार रैंक हासिल की.
नाबिया ने क्या कहा?
नाबिया का कहना है कि वह हमेशा से ही कुछ करना चाहती थीं. अन्य छात्रों की तरह उन्होंने भी स्कूल में साइंस ली, वह डॉक्टर बनाना चाहती थीं, इसके लिए उन्होंने नीट परीक्षा भी क्रैक की. लेकिन उन्हें कुछ समय बाद पता चला की उनका इंट्रेस्ट इस फील्ड में नहीं है. ग्रेजुएशन करते वक्त उन्होंने दूसरे विकल्प देखे. इस दौरान उन्होंने पाया कि यूपीएससी सबसे अच्छा ऑप्शन है. फिर उन्होंने सिविल सेवा की तैयारी की. नाबिया का कहना है कि अगर आपके पास अपना अभिभावकों की दुआएं हो तो आप यूपीएससी ही नहीं बल्कि कोई भी एग्जाम क्रैक कर सकते हैं.
नाबिया को अपने पहले प्रयास में इस परीक्षा में सफलता नहीं मिली. उन्हें कई बार असफलता का सामना करना पड़ा. जिसके बाद छठवें एटेम्पट में उन्होंने सफलता का स्वाद चखा. नाबिया ने कहा कि उन्होंने हर प्रयास में अपनी असफलता को फेलियर की तरह नहीं देखा. उन्होंने हमेशा इसे एक सीखने की प्रोसेस की तरह माना और अंत में उन्हें कामयाबी मिली. उन्होंने हर प्रयास के बाद अपनी तैयारी को और मजबूत किया.
कहां से की है पढ़ाई-लिखाई?
नाबिया की स्कूलिंग गोल मार्किट से हुई है. इसके बाद उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की. उन्होंने यहां से बीएससी की पढ़ाई की. ग्रेजुएशन के बाद उनके पद एमएसी करने का विकल्प था. फिर उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी.
क्या बोले पिता?
नाबिया के पिता परवेज का कहना है कि उन्होंने अपनी बेटी का पूरा साथ दिया. इसमें उनके भाई-दोस्तों ने भी काफी मदद की. उनका कहना है कि वह ज्यादा ऊंची कम्युनिटी से नहीं है. बेटी ने आज नाम रोशन करके दिखाया है. बेटी का सपना आज सच हो गया है अब वह देश की सेवा करने जा रही हैं, जिसके लिए उन्होंने काफी ज्यादा मेहनत भी की.
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