फोनपे (PhonePe) CEO समीर निगम के बयान के बाद PCI (Payments Council of India) ने भी इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट की है। PCI ने कहा कि जहां MDR लागू हो सकता है, वहां यह पेमेंट स्वीकार करने वाले मर्चेंट और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर के बीच व्यावसायिक व्यवस्था होगी। इसका मतलब यह नहीं है कि ग्राहक को UPI इस्तेमाल करने के लिए अलग से पैसे देने होंगे। परिषद ने यह भी स्पष्ट किया है कि छोटे व्यापारी और किराना दुकानदारों को UPI स्वीकार करने पर MDR देने की जरूरत नहीं होगी। यह बात खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि देशभर में लाखों छोटे दुकानदार रोजाना छोटे-छोटे भुगतान के लिए UPI का इस्तेमाल करते हैं।
MDR आखिर होता क्या है?
इसे आसान भाषा में समझें तो जब कोई ग्राहक डिजिटल माध्यम से किसी दुकान या कंपनी को भुगतान करता है, तो उस पेमेंट को प्रॉसेस करने में बैंक, पेमेंट कंपनी और अन्य तकनीकी संस्थाओं की भूमिका होती है। इसके बदले व्यापारी से एक शुल्क लिया जा सकता है, जिसे मर्चेंट डिस्काउंट रेट (Merchant Discount Rate) कहा जाता है। कार्ड पेमेंट में MDR पहले से एक जाना-पहचाना मॉडल है, लेकिन UPI के मामले में लंबे समय से ज्यादातर ट्रांजैक्शन बिना MDR के होते रहे हैं। UPI को 2016 में लॉन्च किया गया था और पिछले कुछ सालों में यह भारत की डिजिटल पेमेंट व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। आज छोटे दुकानदार से लेकर बड़े कारोबारी और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तक इसका इस्तेमाल करते हैं।
सरकार की ओर से कानून में प्रस्तावित बदलाव के पीछे एक बड़ा सवाल UPI के पूरे सिस्टम को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाए रखने का भी है। UPI नेटवर्क को चलाने के लिए लगातार तकनीक, साइबर सिक्योरिटी, फ्रॉड रोकने की व्यवस्था, ग्राहक सहायता और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश करना पड़ता है। पिछले करीब एक दशक में बैंक, फिनटेक कंपनियां, NPCI और RBI समेत पेमेंट इकोसिस्टम से जुड़े संस्थान इस सिस्टम को विकसित करने में लगातार निवेश करते रहे हैं। लेकिन, UPI की लोकप्रियता बढ़ने के साथ-साथ इन सेवाओं को चलाने की लागत भी बढ़ रही है। ऐसे में इंडस्ट्री में यह चर्चा चल रही है कि भविष्य में बड़े और अधिक मूल्य वाले कारोबारी ट्रांजैक्शन से कुछ राजस्व हासिल किया जा सकता है, जबकि आम लोगों के लिए UPI को मुफ्त रखा जाए।
प्रस्तावित व्यवस्था में 2,000 रुपये की सीमा इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे डेली के ज्यादातर छोटे भुगतान प्रभावित नहीं होंगे। उदाहरण के लिए दूध, सब्जी, किराना, छोटी खरीदारी या ऑटो-टैक्सी का किराया जैसे सामान्य भुगतान आम तौर पर इस सीमा के नीचे होते हैं। इसके अलावा व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P पेमेंट को भी संभावित MDR व्यवस्था से बाहर रखने की बात कही गई है, यानी अगर कोई व्यक्ति अपने दोस्त, परिवार के सदस्य या किसी अन्य व्यक्ति को UPI से पैसे भेजता है, तो उस पर इस प्रस्तावित मर्चेंट चार्ज का असर नहीं पड़ेगा।
हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि 0.25% से 0.4% की दर अभी अंतिम चार्ज नहीं मानी जानी चाहिए। अंतिम नियमों में किन कारोबारियों पर MDR लागू होगा, 2,000 रुपये की सीमा कैसे लागू होगी, छोटे व्यापारियों को किस तरह छूट मिलेगी और शुल्क की अधिकतम सीमा क्या होगी, यह सब सरकार की अंतिम अधिसूचना और नियमों से स्पष्ट होगा। इसलिए फिलहाल UPI यूजर्स को घबराने की जरूरत नहीं है।
मौजूदा तस्वीर यही है कि UPI पेमेंट आम ग्राहकों के लिए मुफ्त रहेगा, जबकि संभावित MDR का फोकस चुनिंदा बड़े कारोबारी ट्रांजैक्शन पर हो सकता है। सरकार और पेमेंट इंडस्ट्री का लक्ष्य एक तरफ UPI की मुफ्त और आसान पहुंच को बनाए रखना है, तो दूसरी तरफ इतने बड़े डिजिटल पेमेंट नेटवर्क को चलाने के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर और साइबर सिक्योरिटी में निवेश के लिए टिकाऊ मॉडल तैयार करना है। अंतिम नियम सामने आने के बाद ही यह साफ होगा कि किन कारोबारियों और किन ट्रांजैक्शन पर शुल्क लागू होगा, लेकिन आम UPI यूजर के लिए फिलहाल राहत की बात यही है कि UPI से पैसे भेजने या भुगतान करने पर सीधे कोई चार्ज नहीं लगाया जा रहा है।
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