नई दिल्ली: UPI ट्रांजैक्शन पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर देशभर में काफी चर्चा हो रही है। इस बीच MobiKwik की को-फाउंडर उपासना टाकू ने कहा कि इस फैसले का सीधा असर आम ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि पर्सन-टू-पर्सन लेन-देन पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। साथ उन्होंने यह भी कहा कि बिजली, फोन और गैस बिल जैसी जरूरी सेवाओं के पेमेंट पर भी कंज्यूमर से कोई टैक्स नहीं लिया जाएगा। उपासना टाकू ने इंडिया टीवी को दिए एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में यह बात कही।
पेमेंट कंपनीज़ एक ही मर्चेंट केवाईसी ऑनबोर्डिंग प्रोसेस से करती हैं
उपासना टाकू ने एक सवाल के जवाब में कहा कि Mobikwik जैसी कंपनियों को आइडेंटिफाई करने की जरूरत नहीं होगी। क्योंकि सभी पेमेंट कंपनीज़ मर्चेंट्स को रजिस्टर करती हैं और सारी ट्रांजैक्शंस एनपीसीआई के थ्रू फ्लो करती हैं। जैसे वीजा मास्टर कार्ड, क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड के स्विच है। वैसे एनपीसीआई हमारा होम ग्रोन इंडियन स्विच है। तो सारी ट्रांजैक्शंस एनपीसीआई के स्विच से फ्लो होती है और सभी मर्चेंट्स जो रजिस्टर होते हैं वो सारी पेमेंट कंपनीज़ एक ही मर्चेंट केवाईसी ऑनबोर्डिंग प्रोसेस से करती हैं।
छोटे लेवल की दुकानेंप्रॉपर मर्चेंट की तरह रजिस्टर्ड ही नहीं होते
दूसरी बात ये है कि जो छोटी दुकानें होती हैं, जैसे सब्जी वाले , पान वाले या और छोटी दुकानें हो गई, ये एक्चुअली प्रॉपर मर्चेंट की तरह रजिस्टर्ड ही नहीं होते हैं। क्योंकि इनके पास फिक्स्ड शॉप एंड एस्टैब्लिशमेंट, उद्यम, जीएसटी ये सारी चीजें होती ही नहीं है। तो ये ट्रांजैक्शंस सर्कुलर में पी टू पी या पी टू पीएम के अंडर जाएंगी जहां पे कोई चार्ज भी नहीं है। मर्चेंट के लिए नहीं हैं, ग्राहकों के लिए तो है ही नहीं। अगर किसी छोटे दुकानदार के दिन में करीब 100 डिजिटल पेमेंट होते हैं, तो इनमें केवल कुछ ही ट्रांजैक्शन 2,000 रुपये से अधिक के होते हैं।
पेट्रोल, बिजली बिल, गैस बिल के भुगतान पर नहीं लगेंगे चार्ज
उपासना टाकू ने कहा कि जो रोज की पेमेंट्स है, जैसे- बिजली बिल, गैस बिल भरना है, मोटरसाइकिल या गाड़ी में पेट्रोल डालना है या कोई भी टाइप का ईंधन लेना है। इन सारी ही ट्रांजैक्शंस को एसेंशियल सर्विसेस में काउंट किया जाता है। और इन पे एक फ्लैट फी 5 रुपये की है। तो अगर आप 5000 का पेट्रोल भरवाएं, या आप 1 लाख का क्रेडिट कार्ड बिल पे करें, तो वो भी फीस बिलर या मर्चेंट को देना है, कंज्यूमर को नहीं। इसके बाद जो ट्रांजैक्शंस हैं, मान लीजिए आपने 10 हजार रुपये की फ्लाइट टिकट बुक की है या आपने होटल बुकिंग की है या आपने कपड़े खरीदे हैं या आपने टेलीविजन खरीदा है। इस टाइप की जो हाई वैल्यू ट्रांजैक्शंस हैं उन्हीं पर 0.14 % का चार्ज लगेगा।
UPI कंपनियों के रेवेन्यू मॉडल पर भी बात
उपासना टाकू ने कहा कि पिछले कई वर्षों से UPI ट्रांजैक्शन से पेमेंट कंपनियों को सीधे तौर पर रेवेन्यू नहीं मिल रहा है। उन्होंने बताया कि पेमेंट कंपनियां वॉलेट, बिल पेमेंट और कार्ड ट्रांजैक्शन जैसे दूसरे माध्यमों से कमाई करती हैं। वहीं, UPI ट्रांजैक्शन को प्रोसेस करने में सर्वर, इंजीनियरिंग, रिस्क मैनेजमेंट, फ्रॉड प्रिवेंशन और साइबर सिक्योरिटी पर खर्च होता है। उनका कहना है कि UPI पर सीमित ट्रांजैक्शन में शुल्क लागू होने से पेमेंट कंपनियों को अपने इंफ्रास्ट्रक्चर और साइबर सिक्योरिटी में निवेश करने के लिए अतिरिक्त संसाधन मिल सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में डिजिटल पेमेंट्स को अभी ग्रामीण और छोटे शहरों तक और विस्तार देने की जरूरत है।
क्यू आरकोड बदलने की जरूरत नहीं
UPI चार्ज को लेकर क्यूआर कोड बदलने की चर्चाओं पर उपासना टाकू ने कहा कि ऐसा करने की जरूरत नहीं होगी। उनके मुताबिक, सभी क्यूआर कोड एक ही UPI इकोसिस्टम का हिस्सा हैं और चार्ज व्यवस्था पूरे सिस्टम में समान रहेगी। उन्होंने इंटरव्यू में दावा किया कि UPI चार्ज लागू होने के बावजूद डिजिटल पेमेंट्स की ग्रोथ पर बड़ा असर पड़ने की संभावना नहीं है। साथ ही उन्होंने कहा कि ग्राहकों को UPI इस्तेमाल करने के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा। एक सवाल के जवाब में उपासना टाकू ने उन आशंकाओं को खारिज किया जिसमें कैश इकोनॉमी की वापसी चर्चा हो रही है। उन्होंने कहा कि लोगों को डिजिटल पेमेंट की आदत हो चुकी है और देश में अभी भी बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जिन्हें डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम से जोड़ना बाकी है।
इससे अमेरिकी कंपनियों को फायदा होगा?
UPI चार्ज को अमेरिकी कंपनियों को फायदा पहुंचाने से जोड़ने के सवाल पर उपासना टाकू ने कहा कि UPI इकोसिस्टम में भारतीय कंपनियों के साथ-साथ अमेरिकी कंपनियों की हिस्सेदारी वाली कंपनियां भी मौजूद हैं। उनके मुताबिक, UPI से रेवेन्यू आने पर भारतीय पेमेंट कंपनियों के लिए भी प्रतिस्पर्धा और कारोबार बढ़ाने का अवसर पैदा होगा।
देखें पूरा इंटरव्यू
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