प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) ने उत्तर प्रदेश के वाराणसी शहर के लिए दो प्रमुख राजमार्ग परियोजनाओं को मंजूरी प्रदान की है। इन परियोजनाओं पर कुल मिलाकर लगभग 25,500 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य वाराणसी शहर के भीतर बढ़ती भीड़भाड़ को कम करना और परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाना है।
सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के निर्णयों की जानकारी देते हुए बताया कि पहली परियोजना वरुणा नदी के किनारे राष्ट्रीय राजमार्ग-31 और वाराणसी रिंग रोड को जोड़ने वाले 43.22 किलोमीटर लंबे लिंक रोड के विकास से जुड़ी है। इस पर 10,998.32 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसमें मुख्य सड़क मार्ग, फ्लाईओवर, लूप और सर्विस रोड सहित छह और चार-लेन वाला एलिवेटेड गलियारा बनाया जाएगा। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) इसे हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल (एचएएम) के तहत पूरा करेगा।
कैबिनेट ने दूसरी परियोजना के तहत वाराणसी शहर में ट्रैफिक का दबाव घटाने के लिए गंगा नदी के किनारे राष्ट्रीय राजमार्ग-19 और वाराणसी रिंग रोड के बीच एक नए कॉरिडोर को भी मंजूरी दी है। 46.04 किलोमीटर लंबी इस परियोजना की कुल लागत 14,447.64 करोड़ रुपये होगी। इसमें छह-लेन वाला एलिवेटेड मुख्य मार्ग, केबल-स्टेयड पुल, फुट-ओवर ब्रिज वाला एक बड़ा पुल और सर्विस रोड जैसी सुविधाएं शामिल की गई हैं।
इन दोनों ही बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल के आधार पर तैयार किया जाएगा। यह सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) का एक प्रारूप है जिसका इस्तेमाल देश में बड़े निर्माण कार्यों के वित्तपोषण के लिए किया जाता है। इन सड़कों और पुलों के निर्माण से वाराणसी के निवासियों को जाम से मुक्ति मिलेगी और क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद है।
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