इस बीच, न्यूयॉर्क टाइम्स ने दो अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से दावा किया है कि ईरान अपना एनरिच्ड यूरेनियम अमेरिका को सौंपने के लिए तैयार हो गया है। ट्रंप के बयान और मीडिया रिपोर्टों से डील होने के संकेत तो मिल रहे हैं, लेकिन कई मुद्दों पर अभी स्थिति साफ नहीं है। इस दावे पर ईरान और इजरायल की तरफ से अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
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ईरान ने रखी हैं ये चार शर्तें
बताया जा रहा है कि ईरान और अमेरिका के बीच इस बातचीत में सीजफायर को 60 दिनों के लिए और बढ़ा दिया गया है। इस बढ़ी हुई अवधि में दोनों पक्ष अपनी-अपनी शर्तों पर सहमति बनाने की कोशिश करेंगे। ट्रंप का कहना है कि डील को लेकर उनकी सऊदी अरब, यूएई और कतर समेत नौ देशों के साथ बातचीत हुई है। इस बातचीत में पाकिस्तान और कतर मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, डील के लिए ईरान ने अमेरिका के सामने चार प्रमुख शर्तें रखी हैं। इनमें अपने बंदरगाहों की नाकेबंदी खत्म करने, जब्त संपत्तियों को वापस पाने, युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अस्थायी रूप से खोलने की मांग शामिल है।
क्या डील पर ट्रंप ने इजरायल को छोड़ दिया है?
इस समझौते के शुरुआती ड्राफ्ट में ईरान के खतरनाक बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन प्रोग्राम को रोकने पर कोई खास ध्यान नहीं दिया गया है, जो इजरायल के लिए एक सीधा और बड़ा खतरा हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि इस पूरी बातचीत में इजरायल कहीं नजर नहीं आ रहा है। सवाल उठ रहे हैं कि ट्रंप इस बातचीत में इजरायल को शामिल क्यों नहीं कर रहे हैं, जबकि 28 फरवरी को ईरान पर हमला अमेरिका और इजरायल दोनों ने मिलकर किया था। इसके अलावा, इस डील में इजरायल और मिडिल ईस्ट की सुरक्षा चिंताओं को दूर करने के लिए क्या उपाय किए जा रहे हैं, इस पर भी सस्पेंस बरकरार है।
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डील पर इजरायल का क्या रुख होगा?
अपनी सुरक्षा चिंताओं के समाधान के बिना इस डील पर इजरायल का क्या रुख रहता है, यह देखना अहम होगा। इस बीच, अमेरिका के वरिष्ठ राजनेता लिंडसे ग्राहम ने ईरान के साथ होने वाली इस डील को लेकर अमेरिकी सरकार को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि ईरान में मौजूदा शासन को बनाए रखने वाली डील अमेरिका और इजरायल के हित में नहीं है, क्योंकि इससे ईरान को खुद को दोबारा मजबूत करने का समय मिल जाएगा। सैन्य और आर्थिक रूप से ताकतवर होने के बाद ईरान अपने प्रॉक्सी संगठनों (जैसे लेबनान में हिज्बुल्ला और इराक में शिया मिलिशिया) के जरिए इजरायल और खाड़ी देशों के लिए नया संकट खड़ा कर सकता है।
एक पेज पर नहीं हैं ट्रंप और नेतन्याहू?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान के साथ आगे कैसे निपटा जाए, इस बात पर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच साफ तौर पर मतभेद हैं। हालांकि, ट्रंप ने पत्रकारों से कहा कि नेतन्याहू ‘वही करेंगे जो मैं उनसे करवाना चाहता हूं’ और वे ‘बहुत अच्छे इंसान’ हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को फिर दोहराया कि अमेरिका और ईरान के बीच एक बड़ा समझौता काफी हद तक तय हो गया है, जिससे अब यह संभावना बन रही है कि ईरान युद्ध शायद दोबारा शुरू नहीं होगा।
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