ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस यानी TMC के 20 बागी सांसद सोमवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मिलेंगे। बागी गुट खुद को ‘असली TMC’ के तौर पर मान्यता देने की मांग करेंगे। इस गुट में शामिल सांसद सायोनी घोष और माला रॉय रविवार सुबह कोलकाता से दिल्ली के लिए रवाना हुईं। दोनों को ममता ने पार्टी पद से हटा दिया है। सायोनी पार्टी की यूथ विंग की अध्यक्ष थीं। उनकी जगह अण्रब बनर्जी को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं माला रॉय को महिला मोर्चा के अध्यक्ष पद से हटा दिया गया। हालांकि ममता ने यह फैसला 12 जून को लिया था। जानकारी अब सामने आई। टीएमसी के पास कुल 28 लोकसभा सांसद हैं, जिसमें से 20 अलग हो गए हैं। अब लोकसभा में ममता के पास सिर्फ 8 सांसद बचे हैं। आज के बड़े अपडेट्स ममता की हार के 14 दिन बाद ही टूट गई थी TMC ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस(TMC) में फूट उनकी हार के 14 दिन बाद ही शुरू हो गई थी। 4 मई को रिजल्ट आया था और बागी सांसदों ने 18 मई को ही लोकसभा स्पीकर को लेटर भेजा दिया और अलग गुट बनाने की मांग की थी। इस चिठ्ठी में यूसुफ पठान, सायोनी घोष, काकोली घोष और शताब्दी रॉय जैसे बड़े नाम शामिल हैं। लिस्ट में 19 नाम थे, एक नाम सामने नहीं आया। लेटर का सिर्फ साइन वाला हिस्सा, जिसमें सायोनी के भी हस्ताक्षर 19 बागी लोकसभा सांसदों के नाम… राजनीतिक पार्टी का अलग गुट बनाने का नियम दल-बदल कानून (10वीं अनुसूची) के तहत अलग गुट को मान्यता तभी मिलती है। जब पार्टी के कम से कम दो-तिहाई विधायक या सांसद उसके साथ हों। TMC के मामले में अभी यह स्थिति है… बंगाल में महाराष्ट्र जैसी बगावत, 4 साल पहले उद्धव को खोनी पड़ी थी शिवसेना 20 जून 2022 को महाराष्ट्र में शिवसेना के 55 में से 40 विधायक एकनाथ शिंदे के साथ गए। तब उद्धव सीएम थे। राज्यपाल ने उन्हें फ्लोर टेस्ट को कहा। उद्धव सुप्रीम कोर्ट गए, लेकिन कोर्ट ने फ्लोर टेस्ट नहीं रोका तो उद्धव ने इस्तीफा दे दिया। 30 जून 2022 को शिंदे भाजपा के समर्थन से सीएम बन गए। फिर दोनों गुट एक-दूसरे के विधायकों को अयोग्य ठहराने सुप्रीम कोर्ट गए। कोर्ट ने फैसला स्पीकर राहुल नार्वेकर पर छोड़ दिया। 10 जनवरी 2023 को स्पीकर ने कहा कि जब बगावत हुई, तब शिंदे गुट में 37 विधायक थे। इसलिए यही असली शिवसेना है। स्पीकर ने विधायकों को अयोग्य ठहराने की याचिकाएं खारिज कर दीं। इनकी सदस्यता भी रद्द नहीं की। इसी बीच, चुनाव आयोग ने शिवसेना का चुनाव चिह्न धनुष-बाण शिंदे गुट को दे दिया। ममता के पास अब सिर्फ 22 विधायक और 18 सांसद बचे टीएमसी के पास कुल 28 लोकसभा सांसद थे, जिसमें से 20 अलग हो गए हैं। अब लोकसभा में ममता के पास सिर्फ 8 सांसद बचे हैं। राज्यसभा की बात करें तो 13 में से 4 सांसद इस्तीफा दे चुके हैं यानी सिर्फ 9 राज्यसभा सांसद बचे हैं। विधानसभा की बात करें तो टीएमसी ने इस बार के चुनाव में 80 सीटें जीती थीं। जिसमें से 58 विधायक अलग गुट बना चुके हैं। ममता के पास सिर्फ 22 विधायक बचे हैं। 4 दिन में 4 राज्यसभा सांसद भी इस्तीफा दे चुके हैं TMC के लोकसभा सांसदों के अलावा राज्यसभा सांसद भी टूट रहे हैं। 8 से 11 से जून तक चार राज्यसभा सांसद इस्तीफा दे चुके हैं। 8 जून को सुखेंदु शेखर ने सदस्यता के साथ पार्टी छोड़ी। फिर 10 जून को सुष्मिता देव अलग हो गईं। 11 जून को प्रकाश चिक और कोयल मलिक ने इस्तीफा दे दिया। TMC सांसदों और विधायकों की ममता से बगावत का घटनाक्रम… 8 जून: ममता बनर्जी के 28 में से 20 लोकसभा सांसद टूटे 8 जून को टीएमसी के लोकसभा के 28 सांसदों में से 20 ने एनडीए सरकार को समर्थन देने का फैसला किया था। सांसद और TMC की पूर्व नेता काकोली घोष दस्तीदार ने कहा था कि सांसदों के साइन वाला पत्र लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को भेज दिया है। इसमें अलग संसदीय ब्लॉक के रूप में अलग बैठने की व्यवस्था की मांग भी की गई। 3 जून: 28 साल पुरानी TMC में बगावत, 58 विधायक अलग हुए 3 जून को टीएमसी में पहली बार बगावत की खबर सामने आई थी। 58 बागी विधायकों ने पार्टी से निकाले गए विधायक ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुना। विधानसभा स्पीकर रथींद्र बोस को समर्थन पत्र दिया। इसमें मांग की गई कि ऋतब्रत को नेता विपक्ष घोषित किया जाए। स्पीकर ने मंजूरी दे दी। ——————————- ये खबर भी पढ़ें… कल्याण बनर्जी बोले- अभिषेक मेरे बेटे जैसे; पहले कहा था- ममता या तो मुझे चुनें या अभिषेक को TMC के सांसद कल्याण ने यू-टर्न ले लिया है। उन्होंने शनिवार को कहा कि अभिषेक बनर्जी मेरे बेटे जैसा है और बेटे की सभी गलतियों को माफ करना पिता का काम होता है। इससे पहले उन्होंने 11 जून को उन्होंने कहा था कि ममता बनर्जी को मुझे या अभिषेक में से किसी एक को चुनना होगा। पूरी खबर पढ़ें…
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