दरअसल, केंद्र सरकार ने मई में सोने और चांदी पर कस्टम ड्यूटी को 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया था। यह फैसला पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच देश के विदेशी मुद्रा भंडार और बाहरी खाते पर दबाव कम करने के उद्देश्य से लिया गया था। भारत दुनिया में चीन के बाद सोने का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है। देश में हर साल करीब 700 से 900 टन सोने का आयात होता है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में सोने का आयात मूल्य के लिहाज से करीब 24% बढ़कर रिकॉर्ड 71.9 अरब डॉलर पहुंच गया। हालांकि, इसी दौरान आयात की मात्रा घटकर 721 टन रह गई।
इंपोर्ट ड्यूटी में संभावित कटौती का असर सोने और चांदी के कारोबार से जुड़े लोगों के साथ-साथ आम ग्राहकों पर भी पड़ सकता है। अगर शुल्क कम होता है तो आधिकारिक चैनल से सोने की खरीद और आयात को बढ़ावा मिल सकता है और ग्रे मार्केट पर दबाव कम हो सकता है। दूसरी ओर, सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती विदेशी मुद्रा पर पड़ने वाले दबाव को नियंत्रित करना होगी। ऐसे में शुल्क घटाने का फैसला कई आर्थिक पहलुओं को ध्यान में रखकर लिया जाएगा।
इस बीच सोमवार को सोने की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। वायदा कारोबार में मांग कमजोर रहने के कारण सोने का भाव 2,045 रुपये गिरकर 1,54,236 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया। ऐसे समय में अगर सरकार वास्तव में इंपोर्ट ड्यूटी कम करती है, तो आने वाले दिनों में सोने की कीमतों और घरेलू ज्वेलरी बाजार पर इसका असर देखने को मिल सकता है। हालांकि, फिलहाल इंपोर्ट ड्यूटी में कटौती केवल चर्चा के स्तर पर है और अंतिम निर्णय का इंतजार है।
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