वास्तव में यह आयोजन UK AI Safety Summit, Seoul AI Summit जैसे पूर्व आयोजनों की निरंतरता में वैश्विक AI सहयोग को मजबूत करेगा। जिसका मुख्य थीम ‘पीपुल, प्लैनेट, प्रोग्रेस’ है। ये नीतियों को व्यावहारिक प्रभाव में बदलने पर जोर देता है। इस समिट का वैश्विक महत्व यह है कि AI इम्पैक्ट समिट AI के लोकतंत्रीकरण पर फोकस करता है, विशेष रूप से वैश्विक दक्षिण के देशों के लिए संसाधनों को सुलभ बनाने हेतु सक्रिय किया गया है।
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वहीं, भारत की पूरक नवाचार क्षमता ग्लोबल AI नेतृत्व स्थापित करने में मदद करेगी, साथ ही जिम्मेदार AI शासन के मानकों को आकार देगी। इसमें 16 देशों के राष्ट्राध्यक्षों की भागीदारी आर्थिक कूटनीति और विकासशील राष्ट्रों की आवाज को मजबूत करेगी। इसकी प्रमुख पहलें इस प्रकार हैं जो डेमोक्रेटाइजिंग AI रिसोर्सेज वर्किंग ग्रुप (भारत, मिस्र, केन्या सह-अध्यक्ष) सार्वजनिक AI संसाधनों को किफायती बनाने पर काम कर रहा है।
जहां तक इसके वैश्विक प्रभाव की बात है तो इससे जुड़ीं चुनौतियां समावेशी AI नवाचारों को प्रोत्साहित करेंगी। लिहाजा यह समिट AI को आर्थिक-रणनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित कर वैश्विक विभाजन को पाटेगा। दरअसल, एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का मुख्य एजेंडा एआई को जिम्मेदार, समावेशी और प्रभावी बनाने पर केंद्रित है, जो तीन सूत्रों—लोग (People), ग्रह (Planet), और प्रगति (Progress)—पर आधारित है। यह एजेंडा एक्शन से इंपैक्ट की ओर बढ़ने पर जोर देता है, जिसमें नीतियों को व्यावहारिक बदलावों में बदलना शामिल है।
इस आयोजन का मुख्य सूत्र ,निम्नवत है:- पहला, लोग (People) यानी एआई का समावेशी विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक न्याय में उपयोग। दूसरा, ग्रह (Planet) यानी पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन से लड़ाई और सतत विकास। और तीसरा, प्रगति (Progress) यानी आर्थिक विकास, उत्पादकता वृद्धि और नवाचार को बढ़ावा। इसके दृष्टिगत ही प्रमुख सत्र और चक्र को निर्धारित किया गया है।
एआई इम्पैक्ट समिट को सात ‘चक्रों’ (फोकस एरियाज) में बांटा गया है, जो कार्यशालाओं, पैनल चर्चाओं और उच्च-स्तरीय बैठकों के रूप में आयोजित होंगे। पहला, डेमोक्रेटाइजिंग AI रिसोर्सेज यानी सार्वजनिक AI संसाधनों को किफायती बनाना (भारत, मिस्र, केन्या सह-अध्यक्ष)। दूसरा, वैश्विक प्रभाव चुनौतियां यानी समावेशी AI नवाचारों को प्रोत्साहन। तीसरा, अन्य सत्र जैसे वैज्ञानिक शोध में AI (डॉ. अर्चना शर्मा जैसे विशेषज्ञ), उद्योग नेताओं के साथ नीति चर्चा, और टेक दिग्गजों की भागीदारी।
जहां तक इसके अपेक्षित परिणाम की बात है तो ये सत्र 100+ देशों के नेताओं, वैज्ञानिकों और उद्योगपतियों को जोड़कर वैश्विक AI शासन के मानक स्थापित करेंगे। यह समिट 16-20 फरवरी को नई दिल्ली में चल रहा है, जो ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं को मजबूत करेगा।
दरअसल एआई इम्पैक्ट समिट 2026 से अपेक्षित प्रमुख परिणाम जिम्मेदार AI के वैश्विक मानकों को मजबूत करना और ग्लोबल साउथ के लिए समावेशी विकास को बढ़ावा देना हैं। यह समिट मापने योग्य प्रभावों पर केंद्रित है, जैसे AI संसाधनों का लोकतंत्रीकरण और नीतिगत सहमति। इस दौरान नीतिगत समझौते भी होंगे।
इस समिट से AI शासन के लिए सात कार्य समूहों (चक्रों) के माध्यम से ठोस प्रतिबद्धताएं अपेक्षित हैं, जिनमें डेमोक्रेटाइजिंग AI रिसोर्सेज और सुरक्षित AI पर फोकस शामिल है। वास्तव में ये समझौते स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा जैसे क्षेत्रों में AI अनुप्रयोगों का विस्तार सुनिश्चित करेंगे। जहां तक इसके आर्थिक-सामाजिक प्रभाव की बात है तो वैश्विक दक्षिण में कौशल विकास, सतत AI समाधान और समावेशी नवाचारों को प्रोत्साहन मिलेगा, जो असमानताओं को कम करेगा। भारत के नेतृत्व में 100+ देशों की भागीदारी से आर्थिक कूटनीति मजबूत होगी। इसके दीर्घकालिक परिणाम भी सकारात्मक मिलेंगे।
वास्तव में यह समिट AI एक्शन प्लान और अगले वैश्विक शिखरों की नींव रखेगा, जो पर्यावरण संरक्षण (Planet) और प्रगति (Progress) को जोड़ेगा। कुल मिलाकर, यह AI को व्यापक लाभ पहुंचाने वाली तकनीक के रूप में स्थापित करेगा।
– कमलेश पांडेय
वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक
(इस लेख में लेखक के अपने विचार हैं।)
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