TCS अब अपने कर्मचारियों की गतिविधियों को ट्रैक करने का नया तरीका निकाला है। कंपनी ने ऐसा सॉफ्टवेयर बनाया है, जिससे कंपनी को अपने वर्क लैपटॉप पर हो रही गतिविधियों की बेहतर जानकारी मिल सकेगी।
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हालांकि, इस निगरानी का असल मकसद और दायरा अभी भी साफ नहीं है। कंपनियां ऐसे टूल्स का इस्तेमाल असामान्य गतिविधियों की पहचान करने, सुरक्षा से जुड़े संभावित खतरों का पता लगाने और गोपनीय जानकारी को कॉर्पोरेट सिस्टम से बाहर जाने से रोकने के लिए कर सकती हैं। साथ ही, कर्मचारी अपने डिवाइस का इस्तेमाल कैसे करते हैं, इस बारे में डिटेल इंफॉर्मेशन तक पहुंच होने से वर्कस्पेस पर निगरानी को लेकर चिंताएं भी पैदा हो सकती हैं।
TCS ने अब तक इस सिस्टम को लागू करने के बारे में सार्वजनिक रूप से कोई जानकारी नहीं दी है। कंपनी ने सॉफ्टवेयर प्रोवाइडर की पहचान, इकट्ठा की जा रही जानकारी की कैटेगरी या इकट्ठा किए गए डेटा को कौन-सी टीमें या अधिकारी देख सकते हैं, इस बारे में भी कोई जानकारी नहीं दी है।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि TCS का यह मॉनिटरिंग टूल क्या-क्या कर सकता है। एम्प्लॉई मॉनिटरिंग सिस्टम अक्सर सिर्फ सुरक्षा जांच से कहीं ज्यादा काम करते हैं। हमें नहीं पता कि यह टूल सिर्फ ऐप्स की जानकारी देखता है या कर्मचारियों की गतिविधियों के बारे में और भी गहराई से जानता है।
कर्मचारियों की निगरानी कोई नई बात नहीं है
IT और बिजनेस प्रोसेस मैनेजमेंट इंडस्ट्री में कर्मचारियों की निगरानी करने वाले सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कोई नई बात नहीं है। दूसरी बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों में भी ऐसी ही बहसें हुई हैं। उदाहरण के लिए, हाल ही में मेटा की आलोचना हुई थी। उसने AI डेवलपमेंट के लिए डेटा इकट्ठा करने की पहल के तहत एक ऐसा टूल पेश किया था जो कर्मचारियों के कीस्ट्रोक और माउस की गतिविधियों को रिकॉर्ड कर सकता था।
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बाद में मेटा ने ऐसे कंट्रोल पेश किए जिनसे कर्मचारी डेटा कलेक्शन को 30 मिनट तक रोक सकते थे और छूट के लिए रिक्वेस्ट कर सकते थे। कंपनी ने यह भी कहा कि सिस्टम में संवेदनशील जानकारी की सुरक्षा के लिए उपाय मौजूद थे।
काम की जगह पर निगरानी को लेकर चल रही बहस ने कानूनी और प्राइवेसी से जुड़ी चिंताएं भी पैदा कर दी हैं। येल लॉ की प्रोफेसर इफेओमा अजुनवा ने रॉयटर्स को बताया कि कंपनियां पहले से ही गलत व्यवहार या काम से जुड़ी न होने वाली गतिविधियों की जांच के लिए कंप्यूटर लॉगिंग और स्क्रीनशॉट का इस्तेमाल करती रही हैं, जबकि कीस्ट्रोक मॉनिटरिंग कर्मचारियों की निगरानी को और आगे ले जाती है।
अजुनवा ने कहा, “अमेरिका में संघीय स्तर पर कर्मचारियों की निगरानी को लेकर कोई सीमा तय नहीं है, हालांकि कुछ राज्यों में कर्मचारियों को निगरानी के बारे में विस्तार से जानकारी देना जरूरी है।”
दुनिया के अन्य हिस्सों में नियम अलग-अलग हैं। यॉर्क यूनिवर्सिटी के कानून के प्रोफेसर वेलेरियो डी स्टेफानो ने हाल ही में रॉयटर्स को बताया कि बड़े स्तर पर हो रही कर्मचारियों की निगरानी को यूरोपीय कानून के तहत बड़े प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है, जिसमें सामान्य डेटा प्रोटेक्शन रेगुलेशन के तहत प्राइवेसी प्रोटेक्शन भी शामिल है।
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