मंगलवार को टाटा केमिकल्स (Tata Chemicals) में 20% का अपर सर्किट लगा, जबकि टाटा इंवेस्टमेंट कॉर्पोरेशन (Tata Investment Corporation) का शेयर करीब 10% तक चढ़ गया। वहीं, TCS में भी 5% से ज्यादा की तेजी देखने को मिली। टाटा मोटर्स (Tata Motors) के कॉमर्शियल व्हीकल कारोबार से जुड़े शेयर में करीब 6% की बढ़त आई और यह ₹320 के आसपास पहुंच गया।
निवेशकों के रडार पर टाटा के अन्य शेयर
बाजार में टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल (Tata Motors PV), इंडियन होटल्स (Indian Hotels), टाटा कम्यूनिकेशन (Tata Communications), ट्रेंट (Trent), टाटा Elxsi, टाटा टेक्नोलॉजीस (Tata Technologies), टाइटन (Titan), टाटा पावर (Tata Power), टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट (Tata Consumer Products), वोल्टॉस (Voltas), नेल्को (Nelco) और तेजस नेटवर्क्स (Tejas Networks) जैसे अन्य टाटा शेयर भी निवेशकों के रडार पर हैं।
RBI ने रिजेक्ट किया अनुरोध
दरअसल, टाटा संस (Tata Sons) ने RBI से अपना CoR वापस करने की अनुमति मांगी थी, ताकि उसे एक UCIC (Unregistered Core Investment Company) के तौर पर वर्गीकृत किया जा सके। कंपनी ने यह आवेदन मार्च 2024 में दिया था। लेकिन, 11 सितंबर 2026 को RBI ने इस अनुरोध को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। केंद्रीय बैंक ने टाटा संस (Tata Sons) को NBFC-अपर लेयर संस्थाओं पर लागू सभी नियमों और दिशानिर्देशों का पूरी तरह पालन करने के लिए जरूरी कदम उठाने को कहा है। इसी वजह से अब टाटा संस (Tata Sons) के लिए नियामकीय अनुपालन और संभावित लिस्टिंग का मुद्दा फिर महत्वपूर्ण हो गया है।
टाटा संस IPO को लेकर चर्चा तेज
RBI के फैसले के बाद बाजार में सबसे ज्यादा चर्चा टाटा संस (Tata Sons) IPO को लेकर हो रही है। निवेश बैंकरों और वैल्यूएशन एक्सपर्ट के अनुमानों के मुताबिक संभावित IPO में टाटा संस (Tata Sons) का मूल्यांकन करीब ₹9 लाख करोड़ से ₹12.5 लाख करोड़ के बीच हो सकता है। हालांकि, यह अंतिम वैल्यूएशन नहीं है। टाटा संस (Tata Sons) के निवेश पोर्टफोलियो की अनुमानित वैल्यू करीब ₹15-16 लाख करोड़ बताई जा रही है। होल्डिंग कंपनी होने के कारण बाजार आमतौर पर ऐसी कंपनियों को उनकी कुल संपत्तियों या निवेशों की वैल्यू के मुकाबले डिस्काउंट पर वैल्यू करता है।
टाटा संस (Tata Sons) की संभावित लिस्टिंग का असर इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि कंपनी के पास टाटा ग्रुप की कई बड़ी लिस्टेड और नॉन-लिस्टेड कंपनियों में हिस्सेदारी है। दूसरी ओर टाटा संस (Tata Sons) के बोर्ड और चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन से जुड़ा मुद्दा भी चर्चा में है। उनका मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 में खत्म होना है और बोर्ड की नामांकन एवं पारिश्रमिक समिति उनके दोबारा नियुक्ति के फैसले को लेकर उनसे पुनर्विचार करने को कह सकती है। यह मामला 17 सितंबर को होने वाली टाटा संस (Tata Sons) की बोर्ड बैठक में उठने की संभावना है।
RBI के फैसले ने टाटा संस (Tata Sons) के भविष्य के नियामकीय ढांचे और संभावित IPO को लेकर बाजार की दिलचस्पी बढ़ा दी है। हालांकि, IPO की वैल्यूएशन, टाइमलाइन या लिस्टिंग को अभी अंतिम नहीं माना जा सकता। टाटा ग्रुप के शेयरों में आई तेजी को भी केवल टाटा संस (Tata Sons) IPO की उम्मीद से जोड़कर देखना सही नहीं होगा, क्योंकि प्रत्येक कंपनी के अपने कारोबार, कमाई और बाजार परिस्थितियां भी शेयर कीमत को प्रभावित करती हैं। निवेशकों को किसी भी टाटा शेयर में निवेश से पहले कंपनी के फंडामेंटल और जोखिमों का अलग से आकलन करना चाहिए।
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