ये नतीजे ICCT की ग्लोबल ऑटोमेकर रेटिंग रिपोर्ट से सामने आए हैं। इंटरनेशनल काउंसिल ऑन क्लीन ट्रांसपोर्टेशन (ICCT) ने प्रति किलोमीटर वॉट-घंटे में एनर्जी कंजप्शन को मापा। कम आंकड़े बिजली के ज्यादा कुशल इस्तेमाल को दिखाते हैं। खास बात यह है कि डेटा को गाड़ी के वजन के हिसाब से एडजस्ट किया गया था।
ये नतीजे ICCT की ग्लोबल ऑटोमेकर रेटिंग रिपोर्ट से सामने आए हैं। इंटरनेशनल काउंसिल ऑन क्लीन ट्रांसपोर्टेशन (ICCT) ने प्रति किलोमीटर वॉट-घंटे में एनर्जी कंजप्शन को मापा। कम आंकड़े बिजली के ज्यादा कुशल इस्तेमाल को दिखाते हैं। खास बात यह है कि डेटा को गाड़ी के वजन के हिसाब से एडजस्ट किया गया था।
टाटा को 100 और महिंद्रा को 89 स्कोर मिला
इससे यह पक्का हुआ कि भारी गाड़ियों को गलत तरीके से नुकसान ना हो। इस नतीजे से अलग-अलग कंपनियों के बीच फेयर कम्पेरिजन हो पाया है। टाटा मोटर्स ने 100 का स्कोर हासिल किया, जो सभी 22 ऑटोमेकर्स में सबसे ज्यादा था। महिंद्रा 89 के स्कोर के साथ ठीक पीछे रही। टेस्ला का स्कोर 79 रहा, जबकि BYD 69 स्कोर कर पाई। इससे पता चलता है कि भारतीय EV बहुत ज्यादा एनर्जी-एफिशिएंट हैं।
इस कामयाबी के दो अलग पहलू
इस कामयाबी के साथ एक जरूरी बात भी सामने आई। इसका मतलब यह नहीं है कि टाटा और महिंद्रा सबसे अच्छी EV बनाती हैं। इसका बस इतना मतलब है कि उनकी गाड़ियां प्रति किलोमीटर सबसे कम बिजली इस्तेमाल करती हैं। कुल परफॉर्मेंस कई अन्य जरूरी बातों पर निर्भर करती है। इनमें ड्राइविंग रेंज, चार्जिंग स्पीड और EV की बिक्री में हिस्सेदारी शामिल हैं।
स्ट्रैटजिक कमिटमेंट में दोनों रहीं पीछे
मॉडल की उपलब्धता, निवेश का स्तर और बैटरी रीसाइक्लिंग भी मायने रखते हैं। EV की ओर बढ़ने के लिए स्ट्रैटजिक कमिटमेंट पर भी विचार किया जाता है। इन व्यापक पैमानों पर, दोनों कंपनियां काफी पीछे हैं। टाटा 15वें स्थान पर है, उसने सिर्फ 33 स्कोर हासिल किया। वहीं, महिंद्रा को 17वीं पोजीशन मिली, उसने 30 स्कोर किया।
भारत पहली बार इसमें शामिल हुआ
ICCT रिपोर्ट ने दुनिया के 6 बड़े ऑटोमोबाइल मार्केट का मूल्यांकन किया। स्थापित बाजारों के साथ भारत को पहली बार इसमें शामिल किया गया। इन बाजारों की कुल हिस्सेदारी दुनियाभर में होने वाली EV बिक्री का 90% से ज्यादा है। भारत की मौजूदगी को मजबूत करने के लिए महिंद्रा को नया जोड़ा गया था। यह देश के तेजी से बढ़ते पैसेंजर गाड़ी बाजार को दिखाता है। टाटा और महिंद्रा मिलकर दुनिया की सबसे बड़ी ऑटोमेकर कंपनियों के बीच भारत का प्रतिनिधित्व करती हैं।
ग्लोबल, टेस्ला 83 के स्कोर के साथ कुल रैंकिंग में सबसे ऊपर रही। BYD 72 के कुल स्कोर के साथ दूसरे स्थान पर रही। टाटा मोटर्स ट्रांजिशनर्स यानी बदलाव की तरफ तेजी से बढ़ने वाली कंपनियों की कैटेगरी में सबसे नीचे रही। वहीं, महिंद्रा को रिपोर्ट में लैगार्ड्स यानी पीछे रहने वाली कंपनियों की कैटेगरी में रखा गया।
सोशल मीडिया यूजर्स के निगेटिव रिएक्शन दिए
>> एक यूजर ने कहा, “बहुत बढ़िया। अब हमें अपनी सड़कों की क्वालिटी पर ध्यान देना चाहिए ताकि वे इन वर्ल्ड-क्लास स्टैंडर्ड्स के बराबर हो सकें और लोगों की जान और गाड़ियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।”
>> एक यूजर ने कहा, “क्या आप सच में टाटा या महिंद्रा की कार की तुलना मौजूदा BYD, XPENG और दूसरी कारों से करने जा रहे हैं? मेरा मतलब है, क्या आपने डिजाइन की क्वालिटी, सीटों, मैन्युफैक्चरिंग और ओवरऑल परफॉर्मेंस में अंतर देखा है?”
>> एक यूजर ने पूछा, “क्या हमें इस बात पर ध्यान नहीं देना चाहिए कि सेफ्टी टेस्टिंग की वजह से अमेरिकी गाड़ियां ज्यादा बड़ी और ज्यादा फीचर्स वाली होती हैं, जिससे वे भारी हो जाती हैं?”
>> एक अन्य यूजर ने मजाक के लहजे में कहा, “यह तो फेरारी की तुलना मारुति ऑल्टो से करने और यह कहने जैसा है कि ऑल्टो ज्यादा बेहतर है।”
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