टाटा संस का आएगा आईपीओ?
चार सौर अरब डॉलर के टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस को पहली बार 2022 में अपर लेयर की एनबीएफसी में रखा गया था।। इस वर्गीकरण के तहत कंपनी को कड़े रेगुलेटरी नियमों का पालन करना पड़ता है। इसमें भविष्य में शेयर बाजार में लिस्टिंग होना तथा सख्त संचालन व्यवस्था, पूंजी और खुलासा आवश्यकताओं को पूरा करना शामिल है। बता दें, टाटा संस आईपीओ लाने से बच रहा है। लेकिन अगर वह अपर लेयर एनबीएफसी कैटगरी में बना रहा तो उसका आईपीओ आएगा।
टाटा केमिकल और टाटा इनवेस्टमेंट का क्या है कनेक्शन
मौजूदा समय में टाटा केमिकल की टाटा संस में 3 प्रतिशत हिस्सेदारी है। जिसकी वैल्यू 20,000 करोड़ रुपये है। वहीं, टाटा इनवेस्टमेंट कारपोरेशन लिमिटेड में टाटा संस अन्य समूह की कंपनियों के पास मिलाकर कुल 73.88 प्रतिशत प्रमोटर्स हिस्सेदारी है।
टाटा संस नहीं चाहता है लिस्टिंग
लिस्टिंग से बचने के लिए टाटा संस ने कर्ज का भुगतान किया है। वहीं, अपना एनबीएफसी लाइसेंस भी सरेंडर किया है। जिस पर आरबीआई विचार कर रहा है। बता दें, टाटा संस में हिस्सेदारी रखने वाले शापूरजी पालोनजी ग्रुप लिस्टिंग चाहता है।
डिविडेंड से खूब होती है टाटा संस की कमाई
पारंपरागत एनबीएफसी से अलग, टाटा संस एक प्रमुख निवेशक कंपनी के रूप में काम करती है। इसका मुख्य कारोबार टाटा समूह की कंपनियों में निवेश रखना है, न कि लोन देना। कंपनी की टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, टाटा मोटर्स, टाइटन और इंडियन होटल्स कंपनी जैसी लिस्टेड कंपनियों में बड़ी हिस्सेदारी है। इसकी आय का एक बड़ा हिस्सा इन कंपनियों से मिलने वाले डिविडेंड से आता है।
(यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश से पहले एक्सपर्ट्स की सलाह जरूर लें।)
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