शेयर में इस तेजी की सबसे बड़ी वजह
पिछले सप्ताह कंपनी ने बेंगलुरु में अपनी नई हाई-रिलायबिलिटी इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी का उद्घाटन भी किया। इस संयुक्त उपक्रम में Syrma SGS की 60% हिस्सेदारी है, जिसके लिए कंपनी ने ₹33 करोड़ का निवेश किया है। वहीं Elemaster की 40% हिस्सेदारी है और उसने ₹22 करोड़ लगाए हैं, यानी JV में कुल ₹55 करोड़ का निवेश किया गया है। दोनों कंपनियों के बीच यह ट्रांजैक्शन 14 अप्रैल 2026 को पूरा हुआ था।
नई फैक्ट्री में SMT, THT और बॉक्स-बिल्ड असेंबली जैसी सुविधाएं मौजूद हैं। इससे कंपनी रेलवे और ट्रांसपोर्ट, इंडस्ट्रियल इलेक्ट्रॉनिक्स, एनर्जी और मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे हाई-रिलायबिलिटी सेक्टर के लिए जटिल इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट तैयार कर सकेगी। साथ ही भारत से ग्लोबल OEM (Original Equipment Manufacturers) के लिए मैन्युफैक्चरिंग सपोर्ट उपलब्ध कराने का रास्ता भी मजबूत होगा।
इस पार्टनरशिप में एलेमास्टर (Elemaster) अपने यूरोपीय और ग्लोबल OEM नेटवर्क के साथ इंजीनियरिंग विशेषज्ञता लेकर आया है, जबकि Syrma SGS भारत में अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता, सप्लाई चेन और लागत लाभ का इस्तेमाल करेगी। इससे कंपनी को यूरोपीय ग्राहकों तक पहुंच बढ़ाने और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। ब्रोकरेज फर्म Equirus का मानना है कि यह JV वित्त वर्ष 2027 से कंपनी के लिए नया ग्रोथ इंजन बन सकता है और रेवेन्यू डायवर्सिफिकेशन के साथ मार्जिन प्रोफाइल को भी बेहतर कर सकता है। हालांकि, शेयर में इतनी तेज बढ़त के बाद निवेशकों को कंपनी के कारोबार, वैल्यूएशन और भविष्य की ग्रोथ को ध्यान में रखकर ही निवेश का फैसला करना चाहिए।
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