सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) में महिला अफसरों को स्थायी कमीशन देने के मामले में सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्थायी कमीशन न देना उनकी योग्यता की कमी नहीं, बल्कि व्यवस्था में मौजूद भेदभाव का नतीजा था। जस्टिस सूर्यकांत, उज्जल भुयान और एन कोटिस्वर सिंह की बेंच ने कहा कि उनके काम का आकलन इस सोच के साथ किया गया कि उन्हें परमानेंट कमीशन नहीं मिलेगा। कोर्ट ने कहा- जिन महिलाओं को पहले से परमानेंट कमीशन मिल चुका है, वह बना रहेगा। जो अधिकारी केस के दौरान नौकरी से बाहर हो गईं, उन्हें 20 साल की सेवा पूरी मानकर पेंशन दी जाएगी (बकाया 1 जनवरी 2025 से मिलेगा।
बेंच ने केंद्र सरकार को आगे के लिए साफ और पारदर्शी चयन प्रक्रिया अपनाने और मूल्यांकन के सभी नियम पहले से बताने का निर्देश दिया, ताकि भविष्य में भेदभाव न हो। यह खबर लगातार अपडेट की जा रही है…
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