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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और इरडा को ऐसा पायलट प्रोजेक्ट बनाने को कहा है, जिसमें बिना वैध थर्ड पार्टी बीमा वाले वाहनों को पेट्रोल न दिया जाए। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की बेंच ने नई कारों के लिए अनिवार्य बीमा अवधि 3 से बढ़ाकर 4 साल और नए दोपहिया वाहनों के लिए 5 से बढ़ाकर 6 साल कर दी।
इससे नई गाड़ी खरीदते समय बीमा के लिए ज्यादा रकम एकमुश्त देनी होगी। इरडा को तत्काल निर्देश जारी करने को कहा गया है। बेंच ने कहा कि 2018 में लंबी अवधि का बीमा अनिवार्य किया गया था। इसके 8 साल बाद भी बड़ी संख्या में वाहन बिना बीमा चल रहे हैं। कोर्ट ने हादसा पीड़ितों के हित में अवधि एक साल बढ़ाना जरूरी माना।
केंद्र को निर्देश- हाईवे पर कैमरे लगाए जाएं, बिना बीमा वाहनों का ऑटोमेटिक हो चालान
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईवे पर लगे कैमरों को इंश्योरेंस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो और वाहन पोर्टल से जोड़ा जाए।
- चुनिंदा हाईवे पर टोल प्लाजा की जगह ऑटोमेटिक वाहन पहचान व्यवस्था लागू हो। वहां लगे कैमरे बिना बीमा वाले वाहनों को भी पहचानकर ऑटोमेटिक ई-चालान जारी करें।
- पुलिसकर्मियों को वाहनों के बीमा की रियल टाइम जांच के लिए एप या हैंडहेल्ड डिवाइस दिए जाएं।
- नागरिकों को वाहन का बीमा स्टेटस जांचने की सुविधा भी मिले। इसमें थर्ड पार्टी या कॉम्प्रिहेंसिव पॉलिसी की जानकारी दिखाई दे।
संसदीय समिति की रिपोर्ट के मुताबिक, देश के 30.48 करोड़ वाहनों में से 16.54 करोड़ के पास वैध बीमा नहीं है। यानी करीब 56% वाहन बिना बीमा चल रहे हैं।
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