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भारत के इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट ने गाजियाबाद के हरीश राणा को निष्क्रिया इच्छामृत्यु की अनुमति दी है. कोर्ट ने एम्स नई दिल्ली को इस प्रक्रिया को करने का आदेश दिया है. ऐसे में एम्स में पहली बार किसी को मिलने जा रहे पैसिव यूथनेसिया पर अस्पताल का क्या कहना है, आइए जानते हैं..
हरीश राणा को एम्स पैसिव यूथनेसिया देगा या नहीं, जानें अस्पताल ने क्या कहा..
यह पहला ऐसा मामला है जब एम्स में किसी को निष्क्रिय इच्छामृत्यु देने के लिए कहा गया है, ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी है कि पैसिव यूथनेसिया देने के इस फैसले पर ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज नई दिल्ली का क्या कहना है.
हरीश राणा को अस्पताल में पैसिव यूथनेसिया के तहत लाइफ सपोर्ट सिस्टम हटाने के मामले पर कुछ भी बोलने से इनकार करते हुए एम्स पीआईसी मीडिया सेल की इंचार्ज प्रोफेसर रीमा दादा ने सिर्फ इतना कहा कि अस्पताल माननीय अदालत के दिए गए आदेशों का पालन करेगा.ऐसे में साफ है कि हरीश राणा को पैसिव यूथनेसिया देने की प्रक्रिया अस्पताल में ही जल्द ही पूरी की जाएगी.
बता दें कि हरीश राणा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के रहने वाले हैं. साल 2013 में पंजाब यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करने के दौरान चंडीगढ़ में एक पेइंग गेस्ट हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिर गए थे. इस दुर्घटना में उन्हें गंभीर सिर की चोट (ब्रेन इंजरी) आई और इलाज के बावजूद उनकी स्थिति बेहद गंभीर होती चली गई और वे कोमा में चले गए.
मशीनों के सहारे सांस ले रहे हरीश राणा की कई मेडिकल रिपोर्ट्स में हालत में सुधार न दिखने के बाद उनके माता-पिता ने सुप्रीम कोर्ट में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की याचिका दायर की थी. पिछले 13 साल से बिस्तर पर परमानेंट वेजिटेटिव स्टेट में पड़े हरीश के पेरेंट्स की इस याचिका को अब स्वीकार कर लिया गया है.
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प्रिया गौतम Hindi.News18.com में बतौर सीनियर हेल्थ रिपोर्टर काम कर रही हैं. इन्हें पिछले 14 साल से फील्ड में रिर्पोर्टिंग का अनुभव प्राप्त है. इससे पहले ये हिंदुस्तान दिल्ली, अमर उजाला की कई लोकेशन…और पढ़ें
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