Last Updated:
Paan Seller Success Story: महोबा के राजू चौरसिया 36 साल से पान बना रहे हैं और आज लाखों की संपत्ति होने के बावजूद 10 रुपए का पान बेचते हैं. वे यूपी से एमपी के छतरपुर मेलों में खास तौर पर पान की दुकान लगाने आते हैं. उनका खास मीठा पान नारियल, गुलकंद और विशेष मसालों से तैयार किया जाता है. पान का धंधा अब उनके लिए मजबूरी नहीं बल्कि शौक बन चुका है.
36 साल से पान ही पहचान
राजू चौरसिया बताते हैं कि उन्होंने 15 साल की उम्र में पान बनाना शुरू किया था. साल 1989 से यह सिलसिला चल रहा है. उस समय एक पान अठ्ठनी यानी 50 पैसे में बिकता था. वो कहते हैं कि जिस धंधे ने मुझे बड़ा किया, मेरा घर चलाया, उसे मैं कैसे छोड़ दूं? आज उनके पास मकान, मोटर गाड़ी सब है. बच्चे भी अपने-अपने बिजनेस में लगे हैं, लेकिन राजू जी आज भी मेलों में पान की दुकान जरूर लगाते हैं.
यूपी से एमपी तक लगती है दुकान
राजू महोबा (उत्तर प्रदेश) के रहने वाले हैं, लेकिन छतरपुर (मध्य प्रदेश) के मेलों में खास तौर पर पान की गुमटी लगाने आते हैं. लोगों को जैसे ही खबर मिलती है कि राजू चौरसिया की दुकान लगी है, वे अपने दोस्तों के साथ पान खाने पहुंच जाते हैं. 36 सालों में उन्होंने सिर्फ ग्राहक नहीं, रिश्ते कमाए हैं.
ऐसा क्या खास है इनके पान में?
राजू के पान का स्वाद अलग ही होता है. वो बताते हैं कि उनके पान में नारियल गरी, सौंफ, सुपारी, करोंदा का मीठा मसाला, गुलकंद, गुलाब पत्ती और खास ‘गोपाल की चटनी’ डाली जाती है. देसी पान और बांग्ली पान दोनों 10 रुपए में मिल जाते हैं. देसी पान थोड़ा बड़ा होता है, लेकिन स्वाद दोनों का लाजवाब.
अब बड़ा कारोबार, फिर भी नहीं टूटा रिश्ता
आज राजू पूजा-पाठ सामग्री के थोक व्यापारी भी हैं. उनके बेटे सीमेंट-सरिया का बिजनेस करते हैं. शहर में मकान और महंगी कार है, लेकिन पान से रिश्ता अब शौक बन चुका है. वो कहते हैं अब पान बेचना मजबूरी नहीं, दिल की खुशी है.
About the Author
Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें
Discover more from Hindi News Blogs
Subscribe to get the latest posts sent to your email.