यह कहानी हैदराबाद के सॉफ्टवेयर इंजीनियर विकास ऑल्वेज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा की। उनके मुताबिक, उनके पड़ोसी ने उस्मानिया विश्वविद्यालय से बीटेक किया था और एक निजी कंपनी में लगभग 18 लाख रुपये सालाना वेतन पर काम कर रहे थे
क्यों छोड़ी नौकरी
विकास के अनुसार, पड़ोसी ने बताया कि डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिका के राष्ट्रपति बनने के बाद उनकी कंपनी के प्रोजेक्ट्स प्रभावित होने लगे। नए प्रोजेक्ट्स कम मिलने लगे और कर्मचारियों के बीच नौकरी जाने की आशंका बढ़ गई। ऐसे माहौल में उन्होंने तय किया कि अनिश्चितता में रहने के बजाय खुद का व्यवसाय शुरू करना बेहतर होगा।
उन्होंने नौकरी से इस्तीफा देकर अपनी बचत के पैसों से ऑर्गेनिक डेयरी बिजनेस शुरू किया। इस कारोबार में उन्होंने देसी घी, दही, पनीर और अन्य डेयरी उत्पादों की बिक्री शुरू की। चूंकि उनके ऊपर किसी तरह का कर्ज नहीं था, इसलिए नौकरी छोड़कर नया कारोबार शुरू करने का फैसला लेना उनके लिए अपेक्षाकृत आसान रहा।
हर माह 3.5 का टर्नओवर
विकास का दावा है कि आज उनका यह कारोबार हर महीने करीब ₹3.5 लाख का टर्नओवर कर रहा है, जिसमें से लगभग ₹1.5 लाख का शुद्ध मुनाफा होता है। उनका मानना है कि सही योजना, धैर्य और मेहनत के साथ शुरू किया गया व्यवसाय उन्हें नौकरी की अनिश्चितता से कहीं अधिक स्थिरता दे रहा है।
विकास ने अपने पोस्ट में लिखा कि उनके पड़ोसी ने कहा, “लगातार नौकरी जाने की चिंता करने से बेहतर है कि खुद के लिए कुछ बनाया जाए।” इसी सोच के साथ उन्होंने जोखिम उठाया और अपना पूरा ध्यान कारोबार को सफल बनाने में लगाया। समय के साथ ग्राहकों का भरोसा बढ़ा और उनका व्यवसाय भी लगातार आगे बढ़ता गया।
सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रिया
यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई और नौकरी और उद्यमिता को लेकर बहस छिड़ गई। कई यूजर्स ने इसे आत्मनिर्भरता का बेहतरीन उदाहरण बताया। एक यूजर ने लिखा कि आर्थिक अनिश्चितता कई बार लोगों को नए अवसर तलाशने के लिए प्रेरित करती है और यही नवाचार की असली ताकत है। वहीं, दूसरे यूजर ने कहा कि हर किसी को नौकरी के साथ-साथ आय का दूसरा स्रोत या अपना कोई व्यवसाय विकसित करने की कोशिश करनी चाहिए। हालांकि, कई लोगों ने यह भी कहा कि नौकरी छोड़ने का फैसला हर व्यक्ति की आर्थिक स्थिति और जोखिम उठाने की क्षमता पर निर्भर करता है।
डिस्क्लेमर: इस कहानी में किए गए सभी दावे और विचार संबंधित व्यक्ति के निजी अनुभव हैं। ‘लाइव हिंदुस्तान’ वेबसाइट सोशल मीडिया पोस्ट पर किए गए इन दावों की पुष्टि नहीं करती है।
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