जन्म और परिवार
कैलिफोर्निया के सैन फ्रांसिस्को में 24 फरवरी 1955 को स्टीव जॉब्स का जन्म हुआ था। जब वह छोटे थे, तो वह और उनके पिता इलेक्ट्रॉनिक सामानों पर काम किया करते थे। वह बचपन से ही तेज तर्रार और इनोवेटिव थिंकर थे। हाई स्कूल खत्म करने के बाद उन्होंने पोर्टलैंड के रीड कॉलेज में एडमिशन लिया। लेकिन उनका मन कॉलेज में नहीं लगा और उन्होंने कॉलेज छोड़ दिया। इस दौरान उन्होंने डेढ़ साल क्रिएटिव क्लासेज को दिया। इस दौरान उनको टाइपोग्राफी से लगाव हो गया।
इसे भी पढ़ें: Mahatma Gandhi Birth Anniversary: सत्य और अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी कैसे बने देश के राष्ट्रपिता, जानिए रोचक बातें
वीडियो गेम डिजाइनर
फिर साल 1974 में स्टीव जॉब्स ने वीडियो गेम डिजाइनर की नौकरी कर ली। लेकिन कुछ महीनों बाद ही उन्होंने यहां भी नौकरी छोड़ दी। इस बीच वह भारत घूमने आए और यहां पर उनको साइकीडेलिक अनुभव मिला। स्टीव जॉब्स को भारत में करीब 7 महीने तक रहे थे।
एप्पल की शुरूआत का आइडिया
हाईस्कूल करने के दौरान स्टीव की मुलाकात स्टीव वोजनिएक से हुई थी। बाद में दोनों ने मिलकर एप्पल कंपनी शुरू करने की सोची। दोनों की इलेक्ट्रॉनिक्स में गहरी दिलचस्पी थी, इस कारण दोनों की पार्टनरशिप भी काफी लंबी चली। फिर साल 1976 में दोनों ने मिलकर एक कंपनी की शुरूआत की, इस कंपनी का नाम ‘एप्पल कंप्यूटर’ रखा गया। वहीं इस कंपनी का पहला हेडक्वार्टर स्टीव जॉब्स का फैमिली गैराज था। इसके बाद स्टीव जॉब्स और वोजनिएक ने एप्पल के लिए शुरूआती फंडिग जुटाई।
इस वेंचर को शुरू किए अधिक समय नहीं हुआ था, वहीं दोनों के जुनून ने टेक्नॉलजी इंडस्ट्री की किस्मत को ही बदल दिया। जॉब्स और वोजनिएक ने न सिर्फ टेक्नोलॉजी को डेमोक्रेटाइज किया बल्कि उनको सस्ती, छोटी और हर दिन के उपयोग के लिए भी तैयार किया। वोजनिएक ने यूजर फ्रेंडली पर्सनल कंप्यूटर्स की सीरीज के बारे में पहले ही सोच रखा था। ऐसे में वोजनिएक ने डिजाइन का हिस्सा और स्टीव ने मार्केटिंग का काम लिया। दोनों ने हर कंप्यूटर को शुरू में 666.66 डॉलर में बेचा। एप्पल के दूसरे मॉडल आने के बाद कंपनी की सेल्स 700% बढ़ गई। साल 1980 में एप्पल शेयर मार्केट में लिस्ट हुई और एक पब्लिक कंपनी बन गई।
IBM से मिली टक्कर
बाद में स्टीव जॉब्स ने पेप्सी कोला के मार्केटिंग एक्सपर्ट डॉन स्कूले को एप्पल का सीईओ बनने का ऑफर दिया। लेकिन इसके बाद एप्पल के अगले कुछ प्रोडक्ट्स को कुछ खामियों की वजह से काफी ज्यादा निगेटिव फीडबैक मिलने लगे। इस दौरान IBN ने एप्पल को पीछे करते हुए पर्सनल कम्प्यूटर के सेगमेंट में अपना दबदबा बनाया। फिर साल 1984 में एप्पल ने मैकिंटोश रिलीज किया, जोकि देखने में और काम करने में एक नंबर था। लेकिन इसके बाद भी एप्पल मैकिंटोश IBM के सामने टिक नहीं पाई। जिसका असर स्टीव जॉब्स की पोजिशन पर हुआ और कंपनी में उनको साइडलाइन कर दिया गया। ऐसे में साल 1985 में स्टीव ने एप्पल से इस्तीफा दे दिया।
एप्पल में वापसी
एप्पल छोड़ने के बाद स्टीव ने NeXT नाम की एक हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर कंपनी की शुरूआत की। जिस एप्पल से स्टीव ने इस्तीफा दिया था, साल 1996 में उसने ही NeXT को 429 मिलियन डॉलर में खरीद लिया। ऐसे में साल 1997 में एक बार फिर स्टीव एप्पल में एक नए मैनेजमेंट के साथ लौटे। वहीं स्टीव के वापस आते ही एक बार फिर एप्पल कंपनी दौड़ने लगे। आईमैक पर लोगों का काफी पॉजिटिव रिस्पॉन्स मिला। आने वाले सालों में एप्पल ने आईपॉड, मैकबुक एयर और आईफोन जैसे कई शानदार प्रोडक्ट रेंज में ऑफर किए। हालांकि कॉम्पिटिटर्स वैसे ही टेक्नोलॉजी के लिए खूब मेहनत कर रहे थे, लेकिन नतीजा नहीं निकाल सके। ऐसे में एप्पल आने वाले दिनों में टेक्नोलॉजी का चेहरा बन गई।
मृत्यु
हालांकि एप्पल सफलता की सीढ़ियां चढ़ रही थी, लेकिन धीरे-धीरे स्टीव की जिंदगी के दिन कम होते जा रहे थे। वहीं 05 अक्तूबर 2011 को कैंसर की वजह से 56 साल की उम्र में स्टीव जॉब्स का निधन हो गया था।
Discover more from Hindi News Blogs
Subscribe to get the latest posts sent to your email.