एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने 11 सालों में 37 हजार रुपये महीने से लेकर 2.2 करोड़ रुपये के पैकेज तक का शानदार सफर तय किया है, जिसकी कहानी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है।
37 हजार की पहली नौकरी
रेडिट पर अपनी पहचान गुप्त रखते हुए इस शख्स ने बताया कि उसके करियर की शुरुआत साल 2015 में हुई थी। तब उसने एक सर्विस और कंसल्टिंग कंपनी ज्वाइन की थी, जहां उसकी पहली सैलरी महज 37,000 रुपये प्रति माह तय हुई थी। आज के लिहाज से यह रकम बहुत बड़ी नहीं लगती, लेकिन उस वक्त उसके लिए यह एक बड़ा मौका था। इंजीनियर का कहना है कि उस कंपनी का वर्क कल्चर बहुत शानदार था। वहां उसे तकनीक की बारीकियां सीखने और एक मजबूत अनुभव हासिल करने का भरपूर मौका मिला। चार साल तक वह उसी कंपनी में डटा रहा। मेहनत रंग लाई और उसे प्रमोशन भी मिला, जिससे उसकी सैलरी बढ़कर करीब 1.1 लाख रुपये महीने हो गई। यह एक अच्छी रकम थी लेकिन उसे लगने लगा था कि वह अपने कंफर्ट जोन में आ गया है। जिंदगी में कुछ नया और बड़ा करने की चाहत ने उसे नई राह तलाशने पर मजबूर कर दिया।
FAANG में एंट्री
जिंदगी में असली ट्विस्ट साल 2019 में आया। इस इंजीनियर ने दुनिया की जानी-मानी टेक कंपनियों (फेसबुक (अब मेटा), एमेजॉन, एपल, नेटफ्लिक्स और गूगल) जिन्हें FAANG कहा जाता है, में से एक में नौकरी हासिल कर ली। यहां उसे सीधे 44 लाख रुपये सालाना का पैकेज मिला, जो उसकी पिछली सैलरी के मुकाबले करीब तीन गुना ज्यादा था। इस नई जगह ने उसे बड़े कॉरपोरेट सेटअप का अनुभव दिया। उसे समझ आया कि दुनिया की दिग्गज टेक कंपनियां आखिर कैसे काम करती हैं। लेकिन, हर बड़ी छलांग अपने साथ कुछ चुनौतियां भी लाती है। तभी साल 2020 में कोरोना महामारी ने दस्तक दे दी। वर्क फ्रॉम होम के उस दौर में काम का बोझ इतना ज्यादा बढ़ गया कि इसका सीधा असर उसकी मेंटल हेल्थ पर पड़ने लगा। तनाव और दबाव के चलते 2020 के मध्य में उसने एक बहुत बड़ा और जोखिम भरा फैसला लिया। बिना किसी दूसरी नौकरी के हाथ में हुए, उसने इस शानदार पैकेज वाली जॉब से इस्तीफा दे दिया।
अमेरिकी स्टार्टअप के साथ-साथ खुद का बिजनेस (2020-2024)
कुछ महीनों की बेरोजगारी के बाद, किस्मत ने फिर करवट ली। उसे एक अमेरिकी रियल एस्टेट स्टार्टअप से 50 लाख रुपये सालाना का ऑफर मिला। चूंकि वह बेरोजगार था, इसलिए यह ऑफर पिछली सैलरी से बहुत ज्यादा न होने के बावजूद उसने अपना लिया। इस स्टार्टअप में उसने जमकर मेहनत की। महज आठ महीनों के भीतर उसे प्रमोशन मिला और पैकेज 65 लाख रुपये हो गया। 2021 के अंत तक अप्रेजल के बाद उसकी सैलरी 70 लाख रुपये के करीब पहुंच गई।
इसके बाद मई 2022 में उसने कुछ अपना करने की ठानी। वह एक फिनटेक स्टार्टअप में चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर के तौर पर जुड़ गया। शुरुआत में सब कुछ बेहतरीन रहा, बिजनेस ने रफ्तार भी पकड़ी। लेकिन बाद में लाइसेंस और रेगुलेटरी क्लीयरेंस को लेकर कई अड़चनें सामने आने लगीं। मार्च 2024 आते-आते हालात काफी खराब हो गए। जब एक को-फाउंडर ने कंपनी छोड़ दी, तो उसे भी एहसास हो गया कि अब इस स्टार्टअप को आगे ले जाना बेहद मुश्किल है। अगस्त 2024 में उसने भारी मन से फिर नौकरी की तलाश शुरू कर दी।
टॉक्सिक माहौल के बाद फिर 2.2 करोड़ की उड़ान
अक्टूबर 2024 में उसे एक भारतीय स्टार्टअप में टेक लीडरशिप के रोल में 1.2 करोड़ रुपये का शानदार पैकेज मिला। लेकिन यह खुशी ज्यादा दिन नहीं टिकी। महज तीन महीनों के भीतर ही उसे समझ आ गया कि कंपनी का वर्क कल्चर बेहद टॉक्सिक है। कंपनी का पूरा बिजनेस मॉडल सस्ते मजदूरों के भरोसे चल रहा था। बिना समय बर्बाद किए उसने यह नौकरी भी छोड़ दी। अंततः फरवरी 2025 में उसकी मेहनत और तजुर्बे ने उसे एक और FAANG कंपनी में पहुंचा दिया। यहां उसे 1.5 करोड़ रुपये का ऑफर मिला। शानदार परफॉरमेंस के चलते मार्च 2026 में उसे फिर से प्रमोशन मिला। इसी के साथ उसका सालाना पैकेज 2 करोड़ के पार हो गया। कंपनी के स्टॉक्स में हुए इजाफे को जोड़ लें, तो आज के समय में उसका कुल पैकेज करीब 2.2 करोड़ रुपये बैठता है।
अपनी इस शानदार जर्नी को याद करते हुए इंजीनियर ने एक बेहद अहम बात कही। उसने बताया कि वह न तो किसी बहुत अमीर परिवार से ताल्लुक रखता है और न ही उसने आईआईटी जैसे किसी टियर-1 कॉलेज से पढ़ाई की है। उसने कहा, “11 सालों की कड़ी मेहनत के बाद, आज मैं उतना ही कमा रहा हूं जितना टियर-1 कॉलेज के ग्रेजुएट्स कमाते हैं। यह मेरे लिए एक बहुत बड़ा फ्लेक्स है।”
(डिस्क्लेमर: यह पूरी कहानी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट पर एक यूजर द्वारा किए गए दावों पर आधारित है। लाइव हिन्दुस्तान ने स्वतंत्र रूप से इन दावों की सत्यता की पुष्टि नहीं की है।)
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