पीड़ित को ऐसी फर्जी वेबसाइटों के माध्यम से निवेश करने के लिए राजी किया गया जो भारी रिटर्न और IPO अलॉटमेंट का वादा करती थीं. पूरा भरोसा दिलाने के लिए, गिरोह ने शुरू में पीड़ित को 1.05 लाख रुपये निकालने की अनुमति दी. असली होने का यकीन होने पर, पीड़ित ने 19 अलग-अलग वित्तीय ट्रांजेक्शन के जरिए कुल 1.22 करोड़ रुपये का भारी निवेश कर दिया. इसके बाद धोखेबाजों ने नकली डिजिटल पोर्टल पर 15.69 करोड़ रुपये का फर्जी मुनाफा दिखाया और फिर अलॉट किए गए शेयर जारी करने के लिए अतिरिक्त 35 लाख रुपये की मांग की.
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मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क
डीसीपी वी. अरविंद बाबू ने बताया कि आरोपी कमीशन और रिमोट एक्सेस के जरिए असली बिजनेस अकाउंट इस्तेमाल कर साइबर ठगी की रकम ठिकाने लगाते थे। जांच में एक YES बैंक अकाउंट 26 मामलों से जुड़ा मिला, जिसमें 1.10 करोड़ रुपये से ज्यादा का लेनदेन हुआ। वहीं परभणी के दो आरोपियों का सेंट्रल बैंक अकाउंट 18 मामलों से जुड़ा था, जिसके जरिए 3.37 करोड़ रुपये से अधिक का ट्रांजेक्शन हुआ। गिरोह OTP में हेरफेर कर अकाउंट एक्टिवेट कर अवैध ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के लिए मनी लॉन्ड्रिंग करता था।
पुलिस की चेतावनी
इंस्पेक्टर वाई. गौरी नायडू की टीम ने छह आरोपियों को गिरफ्तार कर तीन मोबाइल, चार डेबिट कार्ड, दो चेकबुक, दो पासबुक और तीन एयरटेल सिम बरामद किए। पुलिस ने कहा कि CBI या कस्टम्स अधिकारी बनकर आने वाले धमकी भरे वीडियो कॉल से न घबराएं, क्योंकि कोई भी सरकारी एजेंसी डिजिटल गिरफ्तारी या स्काइप पर पैसों की मांग नहीं करती। ठगी का शिकार होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।
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