वेस्टइंडीज के खिलाफ दूसरे वनडे में भारत ने 406 रन का बड़ा टारगेट हासिल कर शानदार जीत दर्ज की. इस मैच में शुभमन गिल की 223 रनों की नाबाद पारी ने खूब सुर्खियां बटोरीं, लेकिन मैच के बाद भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने गिल की बल्लेबाजी से ज्यादा उनकी कप्तानी की एक खास बात पर ध्यान दिया. गंभीर ने कहा कि गिल धीरे-धीरे ऐसे कप्तान बन रहे हैं, जो अपने गेंदबाजों को समझते हैं और उनका भरोसा जीत रहे हैं.
गंभीर ने कहा कि कप्तानी की जिम्मेदारी मिलने के बाद गिल के खेल में भी सुधार हुआ है. वो सफेद गेंद के साथ-साथ लाल गेंद के क्रिकेट में भी आगे बढ़ रहे हैं. ड्रेसिंग रूम में गिल को खिलाड़ियों का सम्मान मिलता है और टीम उनकी बात सुनती है. गंभीर के मुताबिक, कप्तान के लिए ये समझना जरूरी है कि गेंदबाजों के लिए मैदान पर हालात कितने मुश्किल हो सकते हैं. इसी वजह से उन्होंने गिल को धीरे-धीरे बॉलर्स का कप्तान बनता बताया.
युवा गेंदबाजों को मुश्किल मैच में क्यों उतारा
गंभीर ने युवा तेज गेंदबाज औकिब नबी और गुरनूर बराड़ को दूसरे वनडे में मौका देने के फैसले का भी बचाव किया. उन्होंने कहा कि 2027 वनडे विश्व कप की तैयारी के लिए युवा खिलाड़ियों को सिर्फ आसान मैचों में मौका देना काफी नहीं है. उन्हें दबाव वाले मुकाबलों में भी खेलने का अनुभव मिलना चाहिए.
गुरनूर ने 10 ओवर में 96 रन देकर 2 विकेट लिए. वहीं औकिब नबी ने अपना वनडे डेब्यू किया और 8.5 ओवर में 84 रन दिए. आंकड़े भले ही उनके पक्ष में नहीं रहे, लेकिन गंभीर का मानना है कि ऐसे मैचों से युवा गेंदबाजों को आगे के लिए जरूरी अनुभव मिलता है.
गुवाहाटी की पिच पर गंभीर की चिंता
इस मैच में दोनों टीमों ने 400 से ज्यादा रन बनाए. इसके बावजूद गंभीर ने गुवाहाटी की पिच पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि गेंद और बल्ले के बीच मुकाबला थोड़ा और बराबरी का होना चाहिए. उनके मुताबिक, सिर्फ गेंदबाज के रन और विकेट देखकर उसका आकलन नहीं करना चाहिए. यह भी देखना चाहिए कि उसने मुश्किल हालात में अपनी योजना को कितनी अच्छी तरह लागू किया. भारत ने इस जीत के साथ तीन मैचों की वनडे सीरीज में 2-0 की बढ़त बना ली है.
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