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दिल्ली की कड़कड़डूमा अदालत ने दिल्ली दंगे के आरोपी शरजील इमाम को अपने चचेरे भाई की शादी में शामिल होने के लिए 7 दिन की अंतरिम जमानत दे दी है। कोर्ट ने उसे चार अक्टूबर से 10 अक्टूबर तक के लिए राहत दी है।
इससे पहले इस साल मार्च में भी इमाम को अंतरिम जमानत दी गई थी। उस समय दिल्ली की एक अदालत ने उसे अपने भाई की शादी में शामिल होने और अपनी बीमार मां की देखभाल करने के लिए 10 दिन की अंतरिम जमानत दी थी।
शरजील इमाम जनवरी 2020 से जेल में बंद है। उस पर 2019 में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध में हुए धरना-प्रदर्शनों की आड़ में फरवरी 2020 में दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों की साजिश रचने का आरोप है।

इससे पहले छोटे भाई की शादी में शामिल होने के लिए 20 मार्च से 30 मार्च तक 10 दिनों के पेरोल मिली थी।
जुलाई में खारिज हो गई थी जमानत याचिका
इससे पहले जुलाई में कड़कड़डूमा अदालत ने इमाम की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। जमानत खारिज करते हुए अदालत ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के पहले से दिए आदेश के चलते वह जमानत अर्जियों पर न तो विचार कर सकती है और न ही कोई राहत दे सकती है।
दरअसल सुप्रीम कोर्ट की राय थी कि अभियोजन पक्ष ने जिन सुरक्षित गवाहों पर भरोसा किया है, उनकी गवाही पूरी होने या इस आदेश की तारीख से एक साल बीतने पर ही याचिकाकर्ता दोबारा जमानत याचिका दायर कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पांच जनवरी 2026 को यह आदेश दिया था।

दिल्ली दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी
शरजील इमाम को 28 जनवरी 2020 को बिहार के जहानाबाद जिले के काको गांव से दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
उस समय उसके खिलाफ देशद्रोह (IPC की धारा 124A) समेत अन्य धाराओं में मामले दर्ज किए गए थे। बाद में 2020 के दिल्ली दंगा मामले में भी उसके खिलाफ UAPA के तहत अलग मामला दर्ज किया गया था।
पूर्वोत्तर दिल्ली हिंसा को लेकर 750 से ज्यादा मामले दर्ज किए गए। इस हिंसा में करीब 53 लोग मारे गए और कई लोग घायल हुए थे। दंगों से जुड़े मामलों में अब तक 250 से ज्यादा चार्जशीट दाखिल की जा चुकी हैं। इनमें 1,153 लोगों को आरोपी बनाया जा चुका है
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