शेयर बाजार में अक्सर ऐसा होता है कि कोई शेयर अचानक 15 से 20 प्रतिशत तक गिर जाता है और निवेशक घबरा जाते हैं. तब सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि क्या इस गिरावट में और पैसा लगाना चाहिए या नुकसान स्वीकार कर बाहर निकल जाना बेहतर रहेगा. बाजार के दिग्गज निवेशकों और विश्लेषकों का कहना है कि सिर्फ गिरावट देखकर फैसला लेना सबसे बड़ी गलती होती है. असली फैसला इस बात पर निर्भर करता है कि कंपनी का कारोबार और कमाई की स्थिति कैसी है.
आमतौर पर कहा जाता है कि गिरते बाजार में शेयरों को खरीदना चाहिए. (Photo-AI)
दरअसल बाजार में गिरावट आना असामान्य नहीं है. अच्छी कंपनियों के शेयर भी कई बार बाजार के माहौल, वैश्विक घटनाओं या किसी सेक्टर में कमजोरी के कारण नीचे आ जाते हैं. इसलिए अनुभवी निवेशक कहते हैं कि गिरावट को सिर्फ नुकसान की नजर से नहीं बल्कि मौके की तरह भी देखा जाना चाहिए, लेकिन इसके लिए सही विश्लेषण जरूरी है.
सबसे पहले खुद से पूछें ये तीन सवाल
किसी भी गिरावट के समय सबसे पहला सवाल यही होना चाहिए कि आपने वह शेयर खरीदा ही क्यों था. अगर आपने कंपनी के कारोबार, कमाई की बढ़त, प्रबंधन और भविष्य की संभावनाओं को देखकर निवेश किया था और आज भी वे कारण मजबूत हैं, तो 20 प्रतिशत की गिरावट कई बार सस्ते दाम पर खरीदने का मौका बन सकती है. दूसरी तरफ अगर शेयर केवल किसी टिप या बाजार के उत्साह में खरीदा गया था, तो गिरावट में डरकर बेच देना आम गलती बन जाती है. इसलिए निवेश की असली वजह को समझना सबसे जरूरी कदम माना जाता है.
दूसरा बड़ा सवाल कंपनी की मौजूदा स्थिति से जुड़ा होता है. निवेशक को देखना चाहिए कि कंपनी की कमाई बढ़ रही है या घट रही है, कर्ज कितना है, नकदी का प्रवाह कैसा है और प्रबंधन की साख कैसी है. अगर कारोबार मजबूत है और सिर्फ बाजार के माहौल के कारण शेयर गिरा है, तो कई विशेषज्ञ इसे लंबे समय के निवेशकों के लिए अवसर मानते हैं. तीसरा सवाल निवेश की अवधि और जोखिम सहने की क्षमता से जुड़ा होता है. अगर निवेश लंबे समय के लिए किया गया है तो 20 से 30 प्रतिशत तक की गिरावट शेयर बाजार में सामान्य मानी जाती है. लेकिन अगर निवेश कम समय के लिए किया गया था या पैसे की जरूरत है, तो नुकसान सीमित करके बाहर निकलना भी समझदारी हो सकती है.
दिग्गज निवेशकों की क्या है राय
दुनिया के कई बड़े निवेशक मानते हैं कि अच्छी कंपनियों में गिरावट से डरना नहीं चाहिए. प्रसिद्ध निवेशक वॉरेन बफेट (Warren Buffett) का मशहूर सिद्धांत है कि जब बाजार में डर का माहौल हो तो समझदारी से निवेश के मौके खोजने चाहिए. भारत में भी कई निवेशकों का मानना रहा है कि मजबूत कंपनी का शेयर अगर बड़ी गिरावट के बाद सस्ता मिल रहा है तो यह लंबे समय के लिए अच्छा मौका हो सकता है. हालांकि इसके लिए कंपनी की वास्तविक स्थिति समझना जरूरी होता है. बाजार विश्लेषकों का भी कहना है कि कई बार पूरे सेक्टर में कमजोरी आने या वैश्विक घटनाओं के कारण भी शेयर गिर जाते हैं. ऐसे मामलों में मजबूत कंपनियां कुछ समय बाद फिर संभल जाती हैं.
गिरावट हमेशा नुकसान नहीं होती
शेयर बाजार के इतिहास को देखें तो बड़े सूचकांक भी कई बार 20 से 25 प्रतिशत तक गिर चुके हैं और बाद में नए शिखर पर पहुंचे हैं. इसलिए केवल गिरावट देखकर घबराना अक्सर गलत फैसला साबित होता है. हालांकि यह भी सच है कि हर गिरा हुआ शेयर दोबारा नहीं उठता. इसलिए निवेश से पहले कंपनी का कारोबार, कर्ज और भविष्य की संभावनाओं को समझना बेहद जरूरी होता है. सही जानकारी और धैर्य के साथ लिया गया फैसला ही निवेशक को लंबे समय में बेहतर परिणाम दे सकता है.
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जय ठाकुर 2018 से खबरों की दुनिया से जुड़े हुए हैं. 2022 से News18Hindi में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं और बिजनेस टीम का हिस्सा हैं. बिजनेस, विशेषकर शेयर बाजार से जुड़ी खबरों में रुचि है. इसके अलावा दे…और पढ़ें
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