सेमीकॉन 2.0 योजना के तहत मंजूर चिप विनिर्माण संयंत्रों को पूरी परियोजना के वाणिज्यिक उत्पादन की घोषणा होने तक परियोजना या उसकी किसी भी परिसंपत्ति को बेचने, हस्तांतरित करने या गिरवी रखने की अनुमति नहीं होगी। सरकार ने बृहस्पतिवार को योजना के दिशानिर्देश जारी करते हुए यह शर्त रखी है। सरकार ने सेमीकॉन 2.0 योजना के तहत 1.27 लाख करोड़ रुपये का प्रोत्साहन परिव्यय तय किया हुआ है।
दिशानिर्देशों के मुताबिक, पूरी परियोजना के वाणिज्यिक उत्पादन की घोषणा तक कंपनी नोडल एजेंसी की पूर्व मंजूरी के बगैर परियोजना की परिसंपत्तियों या उनके किसी हिस्से को बेच या हस्तांतरित नहीं कर सकती और न ही उन पर बंधक या किसी अन्य प्रकार का भार बना सकती है। हालांकि, कारोबार के सामान्य क्रम में ऐसा किया जा सकता है। इस योजना के छह स्तंभों में चिप डिजाइन, मशीन एवं सामग्री, अधिक विनिर्माण (फैब्रिकेशन) संयंत्रों की स्थापना, एटीएमपी एवं ओएसएटी उद्योग को मजबूत करना, शोध एवं विकास तथा प्रतिभा विकास शामिल हैं।
इनमें से मशीन एवं सामग्री, अधिक फैब्रिकेशन संयंत्रों की स्थापना तथा एटीएमपी (असेंबली, परीक्षण, मार्किंग और पैकेजिंग) एवं ओएसएटी (बाहरी एजेंसी के जरिये सेमीकंडक्टर की असेंबली और परीक्षण) उद्योग को और मजबूत करने वाले तीन स्तंभों के दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। मशीन और सामग्री क्षेत्र के तहत आवेदन करने वाली इकाइयां भारत में विनिर्मित कलपुर्जों और उप-इकाइयों की घरेलू खरीद पर उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन (पीएलआई) का लाभ भी ले सकती हैं। योजना के तहत वित्तीय सहायता पाने वाली इकाइयों को पूरी परियोजना के वाणिज्यिक उत्पादन शुरू होने की तारीख से कम-से-कम तीन साल तक वाणिज्यिक उत्पादन जारी रखना होगा।
दिशानिर्देशों के मुताबिक, भूमि और उसके विकास, अस्थायी ढांचे, साइट कार्यालय तथा अन्य अस्थायी सुविधाओं पर हुआ खर्च पात्र पूंजीगत व्यय या निवेश में शामिल नहीं किया जाएगा। प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, निर्माण अवधि के ब्याज और अनुसंधान एवं विकास पर हुआ खर्च भी इसमें शामिल नहीं होगा। योजना के तहत आवेदन करने वाली कंपनी और उसके प्रवर्तक या समूह के पास वित्तीय सहायता समझौते (एफएसए) की अवधि के दौरान परियोजना कंपनी की कुल इक्विटी शेयर पूंजी का कम-से-कम 51 प्रतिशत हिस्सा और उसके अनुरूप मतदान अधिकार होने चाहिए।
यह शर्त वाणिज्यिक उत्पादन शुरू होने के बाद तीन साल की संचालन अवधि के दौरान भी लागू रहेगी। नियंत्रण रखने वाली इकाई की पहचान आवेदन के समय ही करनी होगी और उसकी निरंतरता वित्तीय सहायता जारी रखने की शर्त होगी। इस अवधि में हिस्सेदारी में किसी भी बदलाव की जानकारी नोडल एजेंसी को देनी होगी।
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