रामपुर में मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी में कथित अवैध निर्माण को लेकर जारी ध्वस्तीकरण कार्रवाई के विरोध में समाजवादी पार्टी का प्रतिनिधिमंडल उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय के साथ 23 जुलाई को वहां पहुंचने के साथ जिलाधिकारी से मुलाकात करेगा। नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने कहा कि वह डीएम से मिलकर ध्वस्तीकरण का आदेश वापस लेने की मांग करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यदि मौका मिला तो जेल में बंद सपा नेता आजम खान से भी मुलाकात करेंगे। वहीं इसको लेकर रामपुर के अपर जिलाधिकारी नितिन मदान ने बताया कि जिले में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 को 20 जुलाई से फिर से लागू कर दिया है जो 11 सितंबर तक प्रभावी रहेगी।
त्योहारों को ध्यान में रखते हुए लागू की गई धारा 163
रामपुर के अपर जिलाधिकारी नितिन मदान ने धारा 163 लागू करने को लेकर बताया कि जिले में होने वाली आगामी परीक्षाओं को देखते हुए परीक्षा केंद्रों के 200 मीटर के दायरे में फोटो कॉपी की दुकानें संचालित नहीं होंगी। वहीं आने वाले त्योहारों को ध्यान में रखते हुए शांति और सौहार्द बनाए रखने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा को लागू किया गया है प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। वहीं समाजवादी पार्टी ने जौहर विश्वविद्यालय के मुद्दे पर विरोध दर्ज कराने के लिए 28 सदस्यीय उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल का गठन किया है। इस दल का नेतृत्व माता प्रसाद पांडेय कर रहे हैं जिसमें माल अख्तर और पिंकी सिंह शामिल हैं। इसके अलावा रामपुर, मुरादाबाद और बरेली के पार्टी पदाधिकारी भी शामिल किए गए हैं।
विश्वविद्यालय में बने 38 कथित अवैध भवनों को हटाने का हटाने का दिया गया है आदेश
मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई का खतरा मंडरा रहा है। रामपुर विकास प्राधिकरण यानी आरडीए ने विश्वविद्यालय परिसर में बने 38 कथित अवैध भवनों को हटाने का आदेश दिया गया है। इसके साथ ही लोक निर्माण विभाग ने विश्वविद्यालय परिसर के अंदर स्थित एक सड़क पर बोर्ड लगाकर उसे सार्वजनिक मार्ग घोषित कर दिया है। आरडीए ने 28 जून को विश्वविद्यालय संचालित करने वाले जौहर ट्रस्ट को नोटिस जारी किया था। नोटिस में आरोप लगाया गया कि विश्वविद्यालय परिसर में 82,309.80 वर्गमीटर क्षेत्र में बिना अनुमति निर्माण कराया गया है। प्राधिकरण के अनुसार, परिसर में बने 38 ब्लॉक बिना स्वीकृत भवन मानचित्र के बनाए गए जबकि केवल दो भवनों को जिला पंचायत से पहले अनुमति मिली थी। आरडीए का कहना है कि निर्धारित समय के भीतर जौहर ट्रस्ट के सचिव निर्माण की स्वीकृति से जुड़े दस्तावेज पेश नहीं कर सके। इसके बाद ट्रस्ट को इन 38 भवनों को हटाने के लिए 15 दिन का अतिरिक्त समय दिया गया है। प्राधिकरण ने चेतावनी दी है कि तय समय में कार्रवाई नहीं होने पर ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
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