आरएसएस के महासचिव दत्तात्रेय होसबाले ने हाल ही में कहा था कि हमें पाकिस्तान के साथ बातचीत के रास्ते खुले रखने चाहिए. इसे लेकर RSS से जुड़े संगठन वनवासी कल्याण आश्रम के अध्यक्ष सत्येंद्र सिंह ने कहा कि पाकिस्तान के लोग अंततः अपने इतिहास को समझेंगे और भारत में अपने ‘पूर्वजों की जड़ों और परंपराओं’ की ओर लौटेंगे.
होसबाले के बयान पर क्या बोला RSS से जुड़ा संगठन
सत्येंद्र सिंह ने आरएसएस के महासचिव दत्तात्रेय होसबाले की इस टिप्पणी का भी समर्थन किया कि पाकिस्तान के साथ गतिरोध को तोड़ने के लिए लोगों से लोगों का संपर्क महत्वपूर्ण है और इसके लिए हमेशा एक अवसर होना चाहिए क्योंकि पड़ोसी देश के राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व में अब कोई विश्वास नहीं बचा है. सत्येंद्र सिंह ने कहा कि हालांकि पाकिस्तान को स्वतंत्रता के बाद भारत से अलग करके एक स्वतंत्र देश बनाया गया था, लेकिन वहां रहने वाले लोगों की जड़ें अब भी भारत में हैं.
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से संबद्ध वनवासी कल्याण आश्रम के प्रमुख ने कहा, ‘देर-सवेर, मुस्लिम देश अपने इतिहास पर विचार करेगा और उसे अहसास होगा और एक बार जब वे अपने इतिहास पर ध्यान देंगे तो वे अनिवार्य रूप से अपनी पैतृक परंपराओं की ओर लौटेंगे.’ उन्होंने कहा, ‘अब, यदि हम उन्हें उनकी जड़ों की ओर लौटने में सुविधा प्रदान करना चाहते हैं, तो हमें निश्चित रूप से उनके लिए एक रास्ता खुला रखना होगा.’
पाकिस्तान का भूभाग हमारा हिस्सा: सत्येंद्र सिंह
उनसे होसबाले की उन टिप्पणियों के बारे में पूछा गया, जो उन्होंने हाल ही में ‘पीटीआई’ को दिए एक इंटरव्यू में की थीं. सत्येंद्र सिंह ने कहा, ‘दत्तात्रेय जी की बात बिलकुल सही है. क्योंकि पाकिस्तान का भूभाग असल में हमारे भूभाग का ही एक हिस्सा है. पाकिस्तान के उत्तरी क्षेत्रों में, विशेषकर पहाड़ी इलाकों में, विभिन्न जनजातीय समुदायों के लोग निवास करते हैं.’ उन्होंने कहा कि समय बीतने के साथ-साथ पाकिस्तान में हर कोई अपनी जड़ों की ओर वापस लौटेगा.
वनवासी कल्याण आश्रम के प्रमुख ने कहा, ‘चाहे आज हो या कल, हर कोई आखिरकार अपनी परंपराओं की ओर लौट जाएगा. अगर हम दरवाजा पूरी तरह बंद कर दें, तो क्या इससे स्थायी कटाव नहीं पैदा हो जाएगा?’ भारत और पाकिस्तान के बीच आपसी जुड़ाव की वकालत करते हुए होसबाले ने कहा था, ‘मुझे लगता है कि यही एक उम्मीद है, क्योंकि मेरा दृढ़ विश्वास है कि अंततः नागरिक समाज संबंध (सफल होंगे). क्योंकि हमारे बीच सांस्कृतिक संबंध हैं और हम एक राष्ट्र रहे हैं.’
होसबाले ने इस बात पर भी जोर दिया कि देश की सुरक्षा और आत्म सम्मान की रक्षा करना जरूरी है और मौजूदा सरकार को इसका ध्यान रखना चाहिए, लेकिन साथ ही, भारत को अपने दरवाजे बंद नहीं करने चाहिए बल्कि हमेशा संवाद के लिए तैयार रहना चाहिए. उन्होंने 26/11, पुलवामा और पहलगाम जैसे आतंकवादी हमलों का हवाला देते हुए कहा, ‘देखिए, (कूटनीतिक रूप से) हर संभव प्रयास किया जा चुका है और पाकिस्तान लगातार गलतियां करता रहता है.’
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