(तस्वीरों के साथ)
… फिलेम दीपक सिंह …
नागोया, 24 सितंबर अनुभवी वुशु खिलाड़ी रोशिबिना देवी ने बृहस्पतिवार को भारतीय वुशु संघ के उन्हें टीम में शामिल करने के फैसले को सही करार देते हुए कहा कि वह एशियाई खेलों की टीम में चयन को लेकर साथी खिलाड़ी दिव्यांशी चौधरी की ओर से लगाए गए मानसिक उत्पीड़न के आरोपों को नजरअंदाज करेंगी। पच्चीस वर्षीय रोशिबिना ने चीन की झांग शियाओयू के खिलाफ महिलाओं की 60 किग्रा स्पर्धा के फाइनल में 0-2 से हारकर रजत पदक जीता। इसके साथ ही उन्होंने एशियाई खेलों में लगातार तीसरा पदक अपने नाम किया।
उन्होंने 2018 में कांस्य और पिछले एशियाई खेलों में रजत पदक जीता था। रोशिबिना ने फाइनल के बाद कहा, ‘‘जो कुछ हुआ, वह मेरी वजह से नहीं हुआ। यह महासंघ का फैसला था कि मुझे एशियाई खेलों के लिए चुना जाए।
भारतीय वुशु संघ ने जो भी फैसला लिया, मुझे लगता है कि वह सही था।’’
उन्होंने दिव्यांशी के आरोपों के बारे में पूछे जाने पर कहा, ‘‘मैं इसे नजरअंदाज करूंगी। मैं सिर्फ अपने लक्ष्य पर ध्यान देना चाहती हूं।’’
दिव्यांशी ने जून में श्रीनगर में हुए एशियाई खेलों के चयन ट्रायल में रोशिबिना को हराया था लेकिन ‘एसीएल’ चोट के कारण बाद में उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया। इसके बाद दिव्यांशी ने आरोप लगाया था कि रोशिबिना ने एशियाई खेलों की टीम में जगह बनाने के लिए उनके खिलाफ काम किया।
दिव्यांशी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो में कहा था कि जून से सितंबर तक उन्हें मानसिक रूप से काफी परेशान किया गया और रोशिबिना एशियाई खेलों में जाना चाहती थीं। उन्होंने यह भी कहा था कि उन्होंने चयन ट्रायल में रोशिबिना को हराया था, इसलिए उन्हें एशियाई खेलों में जाने का अधिकार था। भारतीय वुशु संघ ने कहा था कि अगस्त के अंतिम सप्ताह में कराई गई एमआरआई जांच में दिव्यांशी के घुटने में एसीएल के गंभीर चोट और काफी सूजन का पता चला था।
इसी वजह से उनकी जगह रोशिबिना को टीम में शामिल किया गया। दिव्यांशी ने बाद में अपना गुस्सा कम करते हुए कहा था कि भारतीय वुशु संघ उनके मजबूत वापसी करने में पूरा समर्थन कर रहा है। उन्होंने हालांकि रोशिबिना पर उन्हें और उनके परिवार को परेशान करने के आरोप दोहराए थे।
रोशिबिना ने कहा कि उन्हें एशियाई खेलों की टीम में शामिल किए जाने की जानकारी टीम के रवाना होने से कुछ दिन पहले ही मिली थी। उन्होंने कहा, ‘‘जब मैं एशियाई खेलों के लिए यहां आई तो काफी परेशानियां थीं। मुझे तैयारी के लिए ज्यादा समय नहीं मिला।
मुझे अगर ज्यादा समय मिलता तो मैं बेहतर प्रदर्शन कर सकती थी।’’
जब उनसे पूछा गया कि परेशानी क्या थी तो उन्होंने कहा, ‘‘मैं शुरुआत में टीम में नहीं थी। ट्रायल में हारने के बाद यही परेशानी थी।’’
रोशिबिना ने कहा कि चीन की खिलाड़ियों को हराने के लिए भारतीय वुशु खिलाड़ियों को मानसिक रूप से मजबूत होने की जरूरत है। उन्होंने कहा, ‘‘हमें अपनी मानसिक मजबूती पर काम करना होगा।
हमारे पास दो बार के जूनियर विश्व चैंपियन आर्यन हैं, जिन्होंने चीन के खिलाड़ी को पहले ही हराया है। जूनियर खिलाड़ियों को लगता है कि उन पर दबाव है। हम जैसे अनुभवी खिलाड़ी उन्हें बतायेंगे कि हम चीन के खिलाड़ियों को हरा सकते हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘जूनियर खिलाड़ियों को भी विश्वास होगा कि वे ऐसा कर सकते हैं।
वुशु में कई अच्छे खिलाड़ी हैं और मुझे यकीन है कि वे बेहतर प्रदर्शन करेंगे।’’
मुकाबले के दौरान रोशिबिना के दाएं घुटने के पास चोट लगी और उनकी नाक पर भी हल्की चोट लगी। उन्होंने कहा, ‘‘यह सेमीफाइनल मुकाबले के दौरान लगी मामूली चोट है। मुझे नहीं पता कि नाक पर चोट कब लगी।
मुझे मुकाबले के दौरान दर्द का एहसास नहीं होता।’’
अपने रजत पदक के महत्व के बारे में रोशिबिना ने कहा, ‘‘यह एशियाई खेलों में मेरा तीसरा पदक है। सभी वुशु खिलाड़ी पदक जीतने की उम्मीद करते हैं। वे भी मेरी तरह पदक जीतना चाहते हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैं सभी खिलाड़ियों को प्रेरित करना चाहती हूं।
मैं भी उनसे प्रेरणा लेना चाहती हूं। आगामी खेलों में मैं अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करूंगी।
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