रिलायंस इंडस्ट्रीज को वेनेजुएला का कच्चा तेल खरीदने के लिए अमेरिका से लाइसेंस मिल गया है। सूत्रों के अनुसार इस मंजूरी के बाद देश की सबसे बड़ी प्राइवेट रिफाइनर कंपनी अब बिना किसी बिचौलिए के वेनेजुएला से ज्यादा मात्रा में कच्चा तेल इम्पोर्ट कर सकेगी। हालांकि रिलायंस की ओर से इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है। अमेरिका के साथ हुई हालिया ट्रेड डील के बाद यह खबर आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने ट्रेड डील का ऐलान करते हुए कहा था कि भारत ने रूसी तेल का आयात पूरी तरह बंद करने का वादा किया है। जामनगर रिफाइनरी के लिए वेनेजुएला का तेल बढ़िया मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज गुजरात के जामनगर में दुनिया का सबसे बड़ा रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स चलाती है। सूत्रों के मुताबिक, जनवरी के आखिर में अमेरिका ने रिलायंस सहित कुछ अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को वेनेजुएला से सीधे तेल खरीदने की अनुमति दी है। वेनेजुएला का कच्चा तेल भारी कैटेगरी का होता है। जामनगर रिफाइनरी की बनावट ऐसी है कि वहां इस तरह के भारी तेल को प्रोसेस करना आसान और किफायती होता है। इससे कंपनी का प्रॉफिट मार्जिन बढ़ेगा। सरकार ने कंपनियों को अमेरिका और वेनेजुएला से तेल खरीदने को कहा इससे पहले ब्लूमबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि भारत सरकार ने देश की सरकारी तेल कंपनियों से कहा है कि वे अब अमेरिका और वेनेजुएला से ज्यादा कच्चा तेल खरीदने पर विचार करने को कहा है। अमेरिका के साथ हुई हालिया ट्रेड डील के बाद यह निर्देश आए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने ट्रेड डील का ऐलान करते हुए कहा था कि भारत ने रूसी तेल का आयात पूरी तरह बंद करने का वादा किया है। अमेरिका से तेल का आयात लगभग दोगुना करने का लक्ष्य रिपोर्ट्स के अनुसार भारतीय रिफाइनर हर साल अमेरिका से करीब 4 लाख बैरल प्रतिदिन तेल ले सकते हैं। यह पिछले साल के 2.25 लाख बैरल प्रतिदिन के मुकाबले काफी ज्यादा होगा। हालांकि, ये कीमत और रूस के साथ कूटनीतिक संबंधों पर टिका है। फिलहाल पेट्रोलियम मंत्रालय और सरकारी तेल कंपनियों ने इस मामले में आधिकारिक टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। भारत ने 2019 के बाद वेनेजुएला से तेल लेना बंद कर दिया था अमेरिका ने 2019 में वेनेजुएला पर सेंक्शंस लगा दिए थे। इस वजह से भारत समेत कई देशों ने वेनेजुएला का तेल खरीदना बंद कर दिया था। वेनेजुएला पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज (OPEC) का सदस्य है। उसके पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है, लेकिन वह वैश्विक सप्लाई का करीब 1% ही देता है।
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