शादी से पहले कम्पेटिबिलिटी को समझना जरूरी
रिलेशनशिप कोच, मोटिवेटर और लेखक जवाल भट्ट ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर करते हुए लोगों को शादी से पहले पार्टनर के साथ कम्पेटिबिलिटी यानी आपसी तालमेल को समझने की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि शादी चाहे अरेंज हो या लव मैरिज, कुछ बातों को पहले से समझना बेहद जरूरी है।
सिर्फ पसंद और लाइफस्टाइल का मिलना कम्पेटिबिलिटी नहीं
जवाल भट्ट के मुताबिक, कम्पेटिबिलिटी का मतलब सिर्फ यह नहीं है कि दोनों के शौक एक जैसे हों, दोनों की पसंद मिलती हो, एक-दूसरे के साथ अच्छी वाइब आती हो या लाइफस्टाइल और सैलेरी एक जैसी हो। असली कम्पेटिबिलिटी उन साधारण और कभी-कभी उबाऊ लगने वाली परिस्थितियों में नजर आती है, जहां रिश्ते की वास्तविक समझ सामने आती है। इसे भी पढ़ें: Couples Special: बोरिंग Sex Life को रोमांचक बनाने के लिए ट्राई करें ये 4 नई Sex Positions
तनाव में पार्टनर का व्यवहार कैसा होता है?
शादी से पहले यह समझना जरूरी है कि आपका पार्टनर तनाव के समय किस तरह व्यवहार करता है। जब चीजें उसके मन मुताबिक नहीं होतीं, तब उसका रवैया कैसा रहता है? क्या वह गुस्सा करता है, बात करना बंद कर देता है या फिर शांत होकर परिस्थिति को समझने की कोशिश करता है? ऐसे समय का व्यवहार रिश्ते के बारे में काफी कुछ बता सकता है।
नाराजगी में बातचीत कैसे होती है?
हर रिश्ते में मतभेद होना सामान्य है। लेकिन महत्वपूर्ण यह है कि नाराज होने पर दोनों एक-दूसरे से किस तरह बात करते हैं। क्या वे अपनी बात सम्मान के साथ रखते हैं या गुस्से में सामने वाले को नीचा दिखाने लगते हैं? किसी भी रिश्ते में असहमति के दौरान बातचीत का तरीका बहुत मायने रखता है।
क्या पार्टनर आपकी बात सुनता है?
सिर्फ अपनी बात कहना और सामने वाले की बात सुनना, दोनों अलग चीजें हैं। जवाल भट्ट इस बात पर भी जोर देते हैं कि यह देखना जरूरी है कि आपका पार्टनर आपकी बात सच में सुनता है या सिर्फ अपनी बारी आने का इंतजार करता है। किसी रिश्ते में एक-दूसरे को समझने के लिए सुनना उतना ही जरूरी है जितना अपनी बात कहना।
समस्या आने पर रिश्ता बचाने की कोशिश या हार मान लेना?
रिश्ते में परेशानियां और गलतफहमियां आ सकती हैं। ऐसे समय में यह देखना जरूरी है कि पार्टनर समस्या को सुलझाने और रिश्ते को बेहतर बनाने की कोशिश करता है या छोटी-सी परेशानी के बाद हार मान लेता है। रिश्ते को निभाने की इच्छा और समस्या को मिलकर सुलझाने की कोशिश कम्पेटिबिलिटी का अहम हिस्सा है।
फीडबैक मिलने पर रक्षात्मक तो नहीं हो जाते?
अपने पार्टनर से अपनी गलती या किसी व्यवहार को लेकर फीडबैक मिलना किसी को भी अच्छा नहीं लग सकता। लेकिन क्या पार्टनर बिना तुरंत डिफेंसिव हुए आपकी बात समझने की कोशिश करता है? अपनी कमियों को स्वीकार करना और जरूरत पड़ने पर खुद में बदलाव लाने की कोशिश करना एक मजबूत रिश्ते की निशानी हो सकती है। इसे भी पढ़ें: Relationship Tips: सेक्स के बारे में बार-बार सोचते हैं, लेकिन करने की इच्छा नहीं होती, क्यों?
सिर्फ एक्साइटमेंट नहीं, रिश्ते में सुरक्षा भी जरूरी
जवाल भट्ट की इस सलाह का सबसे अहम हिस्सा यह है कि अगर आपको अपने पार्टनर के साथ बहुत एक्साइटमेंट महसूस होती है, लेकिन आप उससे असहमति जताने में सुरक्षित महसूस नहीं करते, तो इसे कम्पेटिबिलिटी नहीं कहा जा सकता। किसी भी मजबूत रिश्ते में प्यार और आकर्षण के साथ यह भरोसा भी होना चाहिए कि आप बिना डर अपनी बात रख सकते हैं।
शादी से पहले इसलिए सिर्फ यह सवाल न पूछें कि क्या हम एक-दूसरे को पसंद करते हैं? बल्कि यह भी समझने की कोशिश करें कि क्या हम मुश्किल समय में एक-दूसरे को समझ और सम्मान दे पाएंगे? क्योंकि रिश्ते की असली परीक्षा अच्छे समय में नहीं, बल्कि मुश्किल परिस्थितियों में होती है।
Discover more from Hindi News Blogs
Subscribe to get the latest posts sent to your email.