मटर चुनते समय यही करें सबसे पहले
स्टोरिंग की शुरुआत सही चुनाव से होती है. जब आप फली से मटर निकालें, तो सभी दानों को एक साथ बैग में भर देने की गलती न करें. बड़े, भरे हुए और सख्त दाने अलग रखें. बहुत छोटे, नरम या सिकुड़े दाने जल्दी खराब होते हैं और बाकी दानों पर भी असर डाल सकते हैं. अगर कोई दाना दागदार दिखे या हल्का सड़ा लगे, उसे तुरंत हटा दें. साफ, एक जैसे दाने ही आगे के स्टेप के लिए सही रहते हैं.
चीनी और नमक वाला गर्म पानी
अब एक बड़े बर्तन में पानी लें. इसमें 2-3 चम्मच चीनी और 1 चम्मच नमक डालें. चीनी दानों का हरा रंग बनाए रखने में मदद करती है, जबकि नमक दानों को सुरक्षित रखने में काम आता है. पानी को अच्छे उबाल तक गरम करें. ये स्टेप मटर की ताजगी लॉक करने में अहम रोल निभाता है.
ब्लांचिंग -बस दो मिनट का खेल
जैसे ही पानी में तेज उबाल आए, गैस बंद कर दें और मटर के दाने पानी में डाल दें. ध्यान रहे, इन्हें पकाना नहीं है. बस 2 मिनट गरम पानी में रहने दें. इससे दानों की ऊपरी परत साफ होती है और उनका रंग सेट हो जाता है. अक्सर दाने ऊपर तैरने लगते हैं-ये इशारा है कि अगला स्टेप करने का समय हो गया.
आइस बाथ का झटका
गरम पानी से निकालते ही मटर को तुरंत बर्फ मिले ठंडे पानी में डाल दें. इससे गरमी का असर रुक जाता है और दाने ज्यादा पकते नहीं. यही ट्रिक उनका हरा रंग बरकरार रखती है. 2-3 मिनट बाद दाने छान लें. इस स्टेप को नजरअंदाज न करें, वरना टेक्सचर बदल सकता है.
सुखाना है, पर धूप नहीं
अब एक साफ सूती कपड़ा बिछाकर मटर फैला दें. इन्हें धूप में न रखें. पंखे की हवा में 4-5 घंटे या रातभर छोड़ दें ताकि ऊपर की नमी खत्म हो जाए. अगर दाने गीले रहेंगे, तो फ्रीजर में उन पर बर्फ जमेगी और स्वाद हल्का हो जाएगा.
पैकिंग का सही तरीका
पूरी तरह सूखने के बाद मटर जिपलॉक बैग या ढक्कन कसकर बंद होने वाले डिब्बे में भरें. बैग में जितनी हो सके हवा निकाल दें. छोटे-छोटे हिस्सों में पैक करना बेहतर रहता है, ताकि बार-बार पूरा बैग बाहर न निकालना पड़े. अब इन्हें सीधे फ्रीजर में रख दें.
इस्तेमाल करते समय ध्यान
मटर निकालते वक्त उन्हें पहले पिघलाने की जरूरत नहीं. सीधे पकवान में डाल सकते हैं. बार-बार पिघलाकर फिर जमाने से दाने नरम पड़ जाते हैं, इसलिए जितनी जरूरत हो उतना ही निकालें.
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