आज ही के दिन यानी की 02 अक्टूबर को भारतीय कला के इतिहास के सबसे महान चित्रकारों और कलाकारों में से एक राजा रवि वर्मा का निधन हो गया था। उन्होंने अपने काम के माध्यम से देवी-देवताओं के स्वरूप को घर-घर तक पहुंचाने का काम किया। राजा रवि वर्मा को आधुनिक भारतीय कला का जनक भी कहा जाता है। उनको ऑयल चित्रकला में महारत हासिल की थी। तो आइए जानते हैं उनकी डेथ एनिवर्सरी के मौके पर राजा रवि वर्मा के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में…
जन्म और परिवार
केरल के त्रावणकोर के किलिमन्नूर गांव में 29 अप्रैल 1848 को राजा रवि वर्मा का जन्म हुआ था। उनके पिता का नाम एझुमाविल नीलकंठन भट्टातिरीपाद था, जोकि संस्कृत और आयुर्वेद के विद्वान थे। उनकी माता उमा अम्बाबाई थंपुरट्टी था, वह एक कवियत्री और लेखिका थीं। उन्होंने महज 5 साल की छोटी उम्र से ही घर की दीवारों पर चॉक से पेंटिंग बनाया करते थे।
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राजा रवि वर्मा के चाचा ने उनकी इस कला को पहचाना। फिर उन्होंने रवि वर्मा को शुरूआती पेंटिंग की टेक्निक सिखाई और समझायी थी। फिर उनके चाचा उन्हें तिरुवनंतपुरम के महल ले गए। यहां पर राजा रवि वर्मा को पेंटिंग की टेक्निक्स और कलर्स को समझने का मौका मिला था।
यूरोपियन तकनीक का उपयोग
राजा रवि वर्मा ने ऑयल पेंटिंग डच आर्टिस्ट थिओडोर जेंसन से और वाटर कलर पेटिंग रामा स्वामी नायडू सीखी थी। वहीं रवि वर्मा ने जितने भी पोट्रेट बनाए थे, वह सभी भारतीय पुराणों के चरित्र पर बनाए थे। इस दौरान राजा रवि वर्मा ने पेंटिंग्स को बनाने के लिए ऑयल कलर और यूरोपीय टेक्नीक का इस्तेमाल किया था। यूरोपीय आर्ट और तकनीक के कारण राजा रवि वर्मा की पेंटिंग्स काफी रियल लगती हैं।
विवादों में भी फंसे
साल 1894 में राजा रवि वर्मा द्वारा लिथोग्राफिक प्रेस खरीदी गई थी। इसमें भगवान की पेंटिंग्स को कॉपी करके कम प्राइज में बेचने लगे थे। लेकिन कुछ समय बाद ही उनकी यह प्रेस बंद हो गई थी। दरअसल, उन्होंने न्यूज पेंटिंग्स बनाई थी, जिस कारण वह विवादों में फंस गए थे। राजा रवि वर्मा ने महाकाव्यों की अप्सराओं जैसे रंभा और उर्वशी की न्यूड तस्वीरें बनाई थीं। इन तस्वीरों का काफी ज्यादा विरोध हुआ था। वहीं रवि वर्मा की प्रेस भी चला दी गई थी।
इसके अलावा उनकी 130 साल पुरानी पेंटिंग यशोदा और कृष्ण नीलामी में करीब 176.20 करोड़ में बिकी थी। यह राजा रवि वर्मा की भारत की सबसे महंगी बिकने वाली पेंटिंग है। इस पेंटिंग को उन्होंने साल 1980 के दशक में बनाई थी। वह पहले ऐसे चित्रकार थे, जिन्होंने देवी-देवताओं और भगवान की पेंटिंग बनाई है।
मृत्यु
वहीं 02 अक्तूबर 1906 को 58 साल की उम्र में राजा रवि वर्मा का निधन हो गया था। लेकिन उनकी मृत्यु के बाद भी उनकी पेंटिंग करोड़ों में बिकती हैं।
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