बिहार के नीट छात्र सचिन ने दावा है कि वे गलती से जनरल टिकट लेकर हावड़ा-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस (वाया गया) में चढ़ गए थे, जिसके बाद उनके साथ रेलवे कर्मियों ने बुरा बर्ताव किया। उन्हें बुरी तरह पीटा गया।
उन्होंने कहा, ‘मुझे लगा था कि अन्य मेल या एक्सप्रेस ट्रेनों की तरह राजधानी एक्सप्रेस में भी आगे या पीछे जनरल डिब्बे होंगे। दो तीन घंटे का ही सफर था। ट्रेन में चढ़ने के बाद उन्होंने रेलवे कर्मचारियों से जनरल कोच के बारे में पूछा और बताया कि उनके पास टिकट अपग्रेड कराने के लिए पैसे नहीं हैं।’
“मुझे इतनी गंदी तरीके से मारा गया कि बता नहीं सकता”
सचिन ने आरोप लगाया कि इसके बाद ट्रेन के टीटीई और अन्य कर्मचारियों ने उनके दुर्व्यवहार किया। उन्होंने यह भी दावा किया कि रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के जवानों ने उनके साथ मारपीट की। वीडियो में भावुक होते हुए उन्होंने कहा, “वहां के टीटीई ने मेरे साथ बुरा बर्ताव किया। पुलिस वालों ने मुझे इतनी गंदी तरीके से मारा कि मैं बता नहीं सकता। वहां के कर्मचारियों ने भी मेरे साथ बदसलूकी की। मैं पिछले डेढ़ घंटे से रो रहा हूं। जिंदगी में पहली बार इतना रोया हूं।
एक्शन हो या फिर भी साइंटिस्ट नहीं बनूंगा, पढ़ाई छोड़ दूंगा
वीडियो में रोते हुए सचिन ने कहा, ‘न्यू दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस के टीटीई और उन रेलवे कर्मियों पर एक्शन होना चाहिए या फिर मैं साइंटिस्ट नहीं बनूंगा, पढ़ाई लिखाई छोड़ दूंगा। इस इंडिया में पढ़ने लिखने का कोई मतलब नहीं। यहां रेलवे छात्रों के साथ बहुत बुरा बर्ताव करता है। यहां पढ़ाई लिखाई की वेल्यू नहीं। मैंने ट्रेन में रेलवे कर्मियों को अपने सारे डॉक्यूमेंट दिखाए थे। कुछ और काम कर लू्ंगा लेकिन भारत में साइंटिस्ट नहीं बनना। नहीं पढ़ना लिखना।”
सोशल मीडिया पर आई समर्थन की बाढ़
सचिन का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है। कई लोगों ने रेलवे प्रशासन से मामले की जांच कराने और दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग की है। एक यूजर ने लिखा, “रेलवे अधिकारियों को मामले की जांच कर संबंधित कर्मचारियों को निलंबित करना चाहिए।” दूसरे यूजर ने कहा, “अगर कोई व्यक्ति अपनी गलती स्वीकार कर रहा है, तो उसके साथ ऐसा व्यवहार नहीं होना चाहिए।” वहीं कई लोगों ने सचिन को हिम्मत न हारने और पढ़ाई जारी रखने की सलाह दी। एक यूजर ने लिखा, “हार मत मानो। यहां तक पहुंचने के लिए तुमने बहुत संघर्ष किया है। मजबूत बने रहो, शुभकामनाएं।” एक अन्य व्यक्ति ने कहा, “इस प्रतिभाशाली छात्र की कहानी सुनकर दिल टूट जाता है। कृपया पढ़ाई मत छोड़ो, शिक्षा बहुत महत्वपूर्ण है।”
हालांकि रेलवे की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
जंतर मंतर पर क्यों पॉपुलर हुए थे सचिन कुमार, क्या है उनकी कहानी
जब रात में री नीट का रिजल्ट घोषित हुआ था तो उस समय तीन बार नीट दे चुके 20 वर्षीय सचिन कुमार जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे थे। बिहार के गया जिले के रहने वाले सचिन बिना किसी को बताए और बिना पैसे के घर से निकलकर जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और सीजेपी के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन में शामिल होने दिल्ली पहुंचे थे। धरना स्थल पर उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी के अभिजीत दीपके से मुलाकात कर अपनी फटी पुरानी बुक दिखाई थी और अपनी कहानी सुनाई थी। बुक की हूलिये और पेजों पर पेन की मार्किंग से दिख रहा था कि वे लंबे समय से नीट के लिए मेहनत कर रहे हैं।
3 बार दिया नीट, नहीं हुआ तो डॉक्टर से साइंटिस्ट बनने का सोचा
सचिन ने NEET परीक्षा क्वालिफाई कर ली, लेकिन उन्हें उम्मीद से काफी कम अंक मिले। इसके चलते आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल कॉलेज (AFMC), पुणे में एमबीबीएस करने का उनका सपना लगभग टूट गया है। सचिन 14 जुलाई को घर से निकले थे और 15 जुलाई से जंतर-मंतर पर खुले आसमान के नीचे रह रहे हैं। उनके पास सिर्फ कुछ किताबों से भरा एक बैग था। उन्होंने आंदोलनकारियों के साथ एकजुटता दिखाते हुए भूख हड़ताल भी की, लेकिन तबीयत बिगड़ने के कारण उन्हें इसे बीच में छोड़ना पड़ा। दिल्ली पहुंचने का उनका सफर भी संघर्षों से भरा रहा। रेलवे स्टेशन तक पहुंचने के लिए उन्होंने पड़ोस के एक सब्जी विक्रेता से 20 रुपये उधार लिए। बिना टिकट जनरल डिब्बे में सफर किया और पूरी यात्रा ट्रेन के शौचालय के पास बैठकर बिताई। आनंद विहार पहुंचने के बाद जंतर-मंतर तक आने के लिए उन्होंने एक अजनबी से 100 रुपये की मदद मांगी।
नीट में आए थे 720 में से 441 अंक
जंतर-मंतर पर ही उन्होंने अपना री-NEET रिजल्ट देखा। OBC श्रेणी में उन्हें 720 में से 441 अंक मिले। पर इस अंक से उनका सपना AFMC पुणे में पढ़ने का सपना टूट गया। डॉक्टर बनने का सपना छोड़ने का फैसला कर लिया।
अब IISER में पढ़कर साइंटिस्ट बनने का सपना
अब वे इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (IISER) में दाखिला लेने की सोच रहे हैं, लेकिन आर्थिक तंगी वहां भी बाधा बन रही है। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने कहा था कि सीट सुरक्षित करने के लिए करीब 35,000 रुपये की जरूरत है और उन्हें नहीं पता कि यह रकम कहां से आएगी। सात भाई-बहनों वाले परिवार से आने वाले सचिन पर घर की स्थिति सुधारने की बड़ी जिम्मेदारी है। उनके पिता गुजरात की एक केमिकल फैक्ट्री में काम करते हैं, जबकि उनकी मां दिव्यांग हैं। सचिन का कहना है कि घर का माहौल पढ़ाई के अनुकूल नहीं था। उन्होंने बताया, “घर में अक्सर झगड़े होते थे। कई बार मैं घर छोड़कर भाग गया था।”
सचिन के NEET में तीन प्रयास, पर नहीं मिला MBBS
2024: 429 अंक, ऑल इंडिया रैंक 2.21 लाख
2025: 394 अंक, ऑल इंडिया रैंक 2.25 लाख
2026 (री-NEET): 441 अंक, ऑल इंडिया रैंक 1.89 लाख
IISER दूसरा और CUET तीसरा ऑप्शन था
सचिन ने CUET भी दिया था, जिसमें उन्हें 750 में से 546 अंक मिले। मेडिकल और IISER के बाद उनकी तीसरी पसंद दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में बीएससी कोर्स थे।
क्यों जुड़े थे छात्र आंदोलन से
NEET विवाद और उससे जुड़े छात्र आत्महत्या के मामलों ने उन्हें छात्र आंदोलन से जुड़ने के लिए प्रेरित किया था।
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