नयी दिल्ली, चार अगस्त दिल्ली की एक अदालत ने धनशोधन मामले में रहेजा डेवलपर्स लिमिटेड के चेयरमैन नवीन एम. रहेजा और प्रबंध निदेशक (एमडी) नयन एन. रहेजा को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दे दी है। अदालत ने कहा कि गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) का आरोपी के अधिकारों पर गंभीर प्रभाव पड़ता है और इन्हें यांत्रिक ढंग से जारी नहीं किया जाना चाहिए। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शीतल चौधरी प्रधान ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की एक अर्जी पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।
इस अर्जी में आरोपी पिता-पुत्र के खिलाफ अनिश्चित समय-सीमा वाले गैर-जमानती वारंट जारी करने की मांग की गई थी। अदालत ने तीन अगस्त को जारी आदेश में कहा, किसी भी आरोपी के खिलाफ कोई प्रक्रिया शुरू करने का मुख्य उद्देश्य अदालत में उसकी उपस्थिति सुनिश्चित करना होता है। आरोपी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी करने के व्यापक प्रभाव होते हैं और यह उसके अधिकारों को प्रभावित करता है, लिहाजा इसे बहुत सोच-समझकर जारी किया जाना चाहिए।
अदालत को सभी पहलुओं पर उचित विचार करना आवश्यक है और प्रक्रिया को यांत्रिक तरीके से जारी नहीं करना चाहिए। ईडी का आरोप है कि दोनों आरोपी जांच में शामिल नहीं हुए और वर्ष 2022 में दर्ज ईसीआईआर (प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट) के संबंध में जारी समन का भी पालन नहीं किया। आरोपियों की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता विकास पाहवा ने अदालत को बताया कि दोनों ने वर्ष 2025 में चार बार व्यक्तिगत रूप से ईडी के समक्ष पेश होकर जांच में सहयोग किया और एजेंसी द्वारा मांगे गए दस्तावेज भी उपलब्ध कराए।
उन्होंने दलील दी कि ईसीआईआर वर्ष 2022 में दर्ज हुई थी, लेकिन जांच में सहयोग के बावजूद ईडी करीब चार साल बाद गैर-जमानती वारंट जारी करने की मांग कर रही है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि दोनों आरोपी न तो फरार हैं और न ही कानून की प्रक्रिया से बच रहे हैं। उन्होंने कहा कि दोनों को जब भी बुलाया जाएगा, वे जांच में शामिल होंगे।
साथ ही, अग्रिम जमानत याचिका और अन्य याचिकाएं दिल्ली उच्च न्यायालय में लंबित हैं। प्रवर्तन निदेशालय ने इन दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि वर्ष 2025 में जांच में शामिल होने के बाद आरोपी चार मौकों पर पेश नहीं हुए और अप्रैल 2026 में जारी समन का भी पालन नहीं किया। उसने कहा कि अग्रिम जमानत याचिका दायर करने से जांच में शामिल होने की बाध्यता समाप्त नहीं होती और न ही इससे एजेंसी की कार्रवाई पर रोक लगती है।
हालांकि, अदालत ने कहा कि ईडी की अर्जी पर बहस अभी पूरी नहीं हुई है और किसी भी प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य आरोपी की उपस्थिति सुनिश्चित करना है। अदालत ने कहा कि दोनों आरोपियों ने जांच में शामिल होने और सहयोग करने की इच्छा जताई है। ऐसे में अगली सुनवाई तक उन्हें गिरफ्तारी से अंतरिम राहत देना उचित होगा।
अदालत ने नवीन और नयन रहेजा को निर्देश दिया कि जांच अधिकारी के बुलाने पर वे जांच में शामिल हों और पूरा सहयोग करें। हालांकि नवीन रहेजा की अधिक उम्र को देखते हुए अदालत ने कहा कि ईडी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेशी संबंधी दिल्ली उच्च न्यायालय के उस फैसले पर विचार कर सकती है, जिसका हवाला बचाव पक्ष ने दिया है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई तीन सितंबर के लिए निर्धारित की है।
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