रघुराम राजन ने क्या कहा?
राजन का सुझाव
राजन का सुझाव है कि सरकार कंपनियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले AI ‘टोकन’ पर एक शुरुआती कम दर का टैक्स लगा सकती है और समय के साथ AI के रोजगार पर पड़ने वाले प्रभाव को समझते हुए इसमें बदलाव किया जा सकता है। हालांकि, टैक्स इतना अधिक नहीं होना चाहिए कि कंपनियां AI अपनाने से ही पीछे हट जाएं। विदेशी AI कंपनियों को भी इस व्यवस्था में शामिल करना जरूरी होगा।
AI से नौकरियों पर असर पड़ना तय
राजन के मुताबिक, AI से नौकरियों पर असर पड़ना तय हो सकता है, लेकिन यह अचानक लाखों-करोड़ों नौकरियां खत्म होने जैसा नहीं होगा। असली सवाल AI को अपनाने की रफ्तार का है। उन्होंने अमेरिकी Census Business Trends and Outlook Survey का हवाला देते हुए बताया कि 20 से ज्यादा कर्मचारियों वाली करीब 20% कंपनियां AI का इस्तेमाल कर रही थीं, जबकि 250 से अधिक कर्मचारियों वाली कंपनियों में यह आंकड़ा करीब 37% था, यानी अभी भी बड़ी संख्या में कंपनियां AI को समझने, उसका परीक्षण करने और अपने काम में शामिल करने की प्रक्रिया में हैं। हालांकि, प्रतिस्पर्धा बढ़ने के साथ कंपनियों पर AI अपनाने का दबाव भी बढ़ सकता है।
भारत के लिए कितना महत्वपूर्ण?
भारत के लिए यह बहस खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश का IT और सर्विस सेक्टर बड़ी संख्या में तकनीकी और बैक-ऑफिस काम पर निर्भर है। राजन का मानना है कि भारत को अपनी कम लागत और कुशल कर्मचारियों की वजह से कुछ समय का फायदा मिल सकता है। पश्चिमी देशों की तुलना में भारत में कुशल सर्विस प्रोफेशनल की लागत काफी कम है। लेकिन, AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ भारतीय कंपनियों और कर्मचारियों को तेजी से नई तकनीक सीखनी होगी, यानी आने वाले समय में रीस्कलिंग और अपस्कलिंग की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है।
सुझाव सिर्फ AI टैक्स तक सीमित नहीं
राजन का सुझाव सिर्फ AI टैक्स तक सीमित नहीं है। वह चाहते हैं कि सरकार उन कंपनियों को टैक्स क्रेडिट या अन्य प्रोत्साहन दे जो तकनीकी बदलाव के कारण प्रभावित होने वाले कर्मचारियों को नई ट्रेनिंग दें और उन्हें नौकरी में बनाए रखें। उनके अनुसार, कंपनियों को कर्मचारियों की ट्रेनिंग सिर्फ एक बार नहीं, बल्कि लगातार करते रहना चाहिए। इससे AI के कारण नौकरी का स्वरूप बदलने वाले कर्मचारियों को नई भूमिका में काम करने का मौका मिल सकता है।
हालांकि, राजन AI को सिर्फ नौकरियां खत्म करने वाली तकनीक नहीं मानते। उनका कहना है कि AI कंपनियों की उत्पादकता बढ़ाकर कीमतें कम कर सकता है, बिक्री और मांग बढ़ा सकता है और इसके परिणामस्वरूप नई नौकरियां भी पैदा हो सकती हैं। AI की मदद से छोटे कारोबारों के लिए अकाउंटिंग, प्रोग्रामिंग जैसे काम आसान और सस्ते हो सकते हैं। कुछ कर्मचारी AI की मदद से पहले से ज्यादा जटिल काम भी कर सकते हैं। इसलिए राजन के अनुसार असली चुनौती यह नहीं है कि AI कितनी नौकरियां खत्म करेगा, बल्कि यह है कि कंपनियां और सरकार कर्मचारियों को बदलती दुनिया के लिए कितनी जल्दी तैयार करती हैं।
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