दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधू ने माना है कि अगले वर्ष लागू होने वाला बैडमिंटन का नया 15-अंक स्कोरिंग प्रारूप आक्रामक खिलाड़ियों के लिए फायदेमंद हो सकता है, लेकिन इसके साथ ही यह खिलाड़ियों के लिए बेहद थकाऊ और शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण भी होगा।
विश्व बैडमिंटन महासंघ (बीडब्ल्यूएफ) ने हाल में 15 अंक वाले तीन गेम की स्कोरिंग प्रणाली को मंजूरी दी है, जिसे चार जनवरी 2027 से लागू किया जाएगा।
इस नए प्रारूप पर भारतीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों की मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
हाल में बीडब्ल्यूएफ ‘एथलीट्स कमीशन’ की अध्यक्ष बनी सिंधू पहले भी कह चुकी हैं कि “अधिकांश खिलाड़ी मानते हैं कि 21 अंक प्रणाली बैडमिंटन के आकर्षण, लय और रणनीतिक गहराई के लिहाज से बेहतर है।”
थाईलैंड ओपन के क्वार्टर फाइनल में शुक्रवार को जापान की अकाने यामागुची से हारने के बाद उन्होंने नए स्कोरिंग प्रणाली पर अपनी राय दी।
उन्होंने कहा, “हां, मुझे लगता है कि यह आक्रामक खिलाड़ियों के लिए फायदेमंद है, लेकिन आपको शुरुआत से ही तेज होना होगा। आप शुरुआत में खुद को सेट नहीं कर सकते, तुरंत आक्रामक और तेज रहना होगा।”
सिंधू ने आगे कहा, “यह बहुत थकाऊ होगा और आपको हर समय सतर्क रहना पड़ेगा। यह मानसिक और शारीरिक रूप से बहुत थका देने वाला होगा क्योंकि आपको लगातार हर तरफ सक्रिय रहना होगा।”
सिंधू का मानना है कि नया प्रारूप अनुभवी खिलाड़ियों के लिए कुछ हद तक लाभदायक हो सकता है क्योंकि मैच छोटे हो जाएंगे।
उन्होंने कहा, “ यह अधिक उम्र वाले खिलाड़ियों के लिए यह मददगार हो सकता है क्योंकि वे अपना करियर 2-3 साल और बढ़ाना चाहेंगे। मैच छोटे होने से फायदा मिलेगा।”
सिंधू इस बात से सहमत नहीं हैं कि नया प्रारूप खिलाड़ियों का भार कम करेगा।
उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता कि भार कम होगा। 21-अंक प्राणाली में आपके पास वापसी करने के लिए 5-6 अंक का समय होता है लेकिन 15 अंक प्रणाली में वह मौका नहीं मिलेगा। 7-7 अंक के बाद खेल लगभग खत्म हो जाएगा।
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