चर्चित राइटर मधु पूर्णिमा किश्वर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ा कथित भ्रामक और आपत्तिजनक वीडियो इंटरनेट मीडिया पर शेयर करने के मामले में अब पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट का रुख किया है। मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि बुधवार सुबह तक इस केस की स्टेटस रिपोर्ट अदालत में दाखिल की जाए। यह मामला चंडीगढ़ के सेक्टर-26 थाना में 19 अप्रैल को दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। यह है मामला पुलिस के अनुसार इंटरनेट मीडिया पर PM मोदी से संबंधित एक कथित भ्रामक और आपत्तिजनक वीडियो साझा किया गया था। इसी मामले में मधु पूर्णिमा किश्वर को आरोपी बनाया गया है। इससे पहले चंडीगढ़ की जिला अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। जिला अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद उन्होंने अब हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की है। हाईकोर्ट में यह दलील दी मधु किश्वर ने अपनी याचिका में कहा है कि एफआईआर में लगाए गए आरोप अस्पष्ट और अस्थिर हैं। उन्होंने अदालत को बताया कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं रखा गया, जिससे यह साबित हो सके कि उन्होंने जानबूझकर कोई आपराधिक कृत्य किया हो। याचिका में यह भी कहा गया कि विवादित वीडियो क्लिप न तो उन्होंने बनाई और न ही मूल रूप से अपलोड की। उनके अनुसार यह सामग्री पहले किसी संदिग्ध और गैर-पहचाने इंटरनेट मीडिया हैंडल से पोस्ट की गई थी। AI से तैयार कंटेंट होने की आशंका जताई याचिका में मधु किश्वर ने दावा किया कि उन्होंने खुद सार्वजनिक रूप से यह आशंका जताई थी कि संबंधित वीडियो संभवतः आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक की मदद से तैयार किया गया भ्रामक कंटेंट हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि एफआईआर में खुद उल्लेख है कि वीडियो मूल रूप से परदीप कौर ढिल्लों नामक व्यक्ति द्वारा पोस्ट किया गया था। चयनात्मक कार्रवाई का आरोप याचिका में कहा गया है कि शिकायत में कई अन्य इंटरनेट मीडिया लिंक और व्यक्तियों के नामों का भी जिक्र है, लेकिन इसके बावजूद केवल उन्हें ही आरोपी बनाया गया। मधु किश्वर ने जांच एजेंसियों पर चयनात्मक कार्रवाई का आरोप लगाते हुए कहा कि केवल एक व्यक्ति को निशाना बनाया गया है। उन्होंने अदालत से गिरफ्तारी से संरक्षण देते हुए अग्रिम जमानत देने की मांग की है।
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