आज शनिवार को प्राइम वीडियो पर एक साउथ फिल्म छाई हुई है। इस फिल्म का नाम है ‘मिस्टर मिडिल क्लास’। इस फिल्म की कहानी आपको इम्प्रेस कर देगी। शुरू से अंत तक ये कहानी आप पर गहरा प्रभाव छोड़ती है।
फिल्म मिस्टर मिडिल क्लास की कहानी
फिल्म की कहानी एक विष्णु भक्त वेंकटरमण से होती है। वो घर में पेरूमल यानी भगवान विष्णु की पूजा करता है। सुबह शाम भगवान को अगरबत्ती दिखाता है पाठ करता है। वेंकटरमण को यकीन होता है एक दिन भगवान उसकी जरूर सुनेंगे। लेकिन इसमें सालों बीत जाते हैं। उसके घर में खाने को खाना नहीं है, एक प्रेग्नेंट बहन साथ रहती है। बच्चा है जो स्कूल जाता है, जिसकी फीस नहीं दी गई है। पत्नी को विदेश घुमाने का वादा सालों पहले किया था। लेकिन वो जिंदगी में कुछ नहीं कर पाया। पत्नी के गहने बेच कर एक बिज़नस शुरू किया था जो डूब गया। कर्जा इतना है कि हर दो दिन में साहूकार घर आते कर्जा मांगने आते हैं। वेंकटरमण हर दिन विष्णु भगवान के मंदिर जाता है और वहां के पंडित के साथ उसका एक जुड़ाव हो जाता है।
वेंकटरमण औएर भगवान विष्णु का रिश्ता
एक दिन साहूकार घर आता है और पैसों के लिए धमकी देता है। ऐसे में उसकी पत्नी अपने बचे हुए गहने और मंगलसूत्र उतार कर देती है। वेंकटरमण इन गहनों को बेचकर कर्ज चुकाने के लिए पैसे लाता है। लेकिन तभी वो देखता है कि मंदिर के पंडित की अचानक तबीयत बिगड़ गई है। वो उसे हॉस्पिटल लेकर जाता है। वहां डॉक्टर पंडित को बचाने के लिए मोटा बिल बना देता है। पंडित को बचाने के लिए वेंकटरमण अपना सारा पैसा दे देता है। जब वो घर पहुंचता है तो साहूकार उसकी इस दरियादिली को देखकर प्रभावित होता है। लेकिन पत्नी निराश हो जाती है। इसी बीच वेंकटरमण की एक चौकीदार की नौकरी लग जाती है।
वेंकटरमण को मिलता है खजाना
वो मंदिर की चौकीदारी करता है तो उसे भगवान विष्णु के दर्शन होते हैं। पहले तो उसे यकीन नहीं होता। लेकिन बाद में वो समझ जाता है कि यही उनके भगवान है। उसे लाखों और करोड़ों के गहने मिलते हैं। पहले उसे शक होता है कि ये गहने नकली है तो वो हाथ का एक ब्रेसलेट लेकर ज्वेलर के पास जाता है। उसे पता चलता है कि ये अकेला ब्रेसलेट 5 लाख का है। वो घर वापस जाता है और उसे ओअता चलता है कि पत्नी ने सारे गहने नकली समझ कर पानी में फेंक दिए हैं। इसी बीच ज्वेलर वेंकटरमण पर झूठा चोरी का केस लगा देता है और उसके साथ से वो ब्रेसलेट भी चला जाता है।
पैसों की बरसात
वेंकटरमण मरने की कोशिश करता है। तभी उसे फिर से भगवान विष्णु के दर्शन होते हैं। वो उसे एक ऐसी किताब देते हैं जिसमें वो अपनी 13 इच्छाओं को लेकर पूरा करवा सकता है। लेकिन वो किताब ऑटो में भूल आता है। बाद में जब ऑटो ड्राईवर उसे वो किताब लौटाने आता है तो वो उसे इनाम में 1 करोड़ रुपए देता है। इसके बाद वो अपनी इच्छाएं पूरी करता है। लेकिन कहानी में आगे ट्विस्ट तब आता है जब इस किताब का गलत इस्तेमाल होने लगता है।
कहानी का अंत
कहानी में आगे वेंकटरमण की पत्नी पर मुसीबत आती है और वो गुंडों से लड़ाई कर उस किताब के आखिरी पेज पर लिखता है कि जो भी उसने अभी तक मांगा था वो सब वापस ले लो। ऐसे में सब कुछ पहले जैसा हो जाता है। वेंकटरमण वापस अपनी सिक्यूरिटी गार्ड की नौकरी पर चला जाता है। और अंत में उसे वो गहने भी मिल जाते हैं जो उसकी पत्नी ने पानी में फेंक दिए थे। वो उन गहनों को मंदिर में जाकर वापस भगवान पर चढ़ा देता है।
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