BPSC Success Story: नवादा की बेटी और मुजफ्फरपुर की बहू प्रीति कुमारी ने 6 माह की बच्ची को संभालते और नौकरी करते हुए BPSC में 166वीं रैंक लाकर SDM का पद हासिल किया।
नवोदय से JNU तक का शानदार सफर
प्रीति कुमारी का पारिवारिक माहौल शुरुआत से ही शिक्षा से जुड़ा रहा है। उनके पिता नंदकिशोर प्रसाद नवोदय विद्यालय में शिक्षक हैं और मां अनिता कुमारी गृहिणी हैं। प्रीति ने अपनी 12वीं तक की पढ़ाई जवाहर नवोदय विद्यालय, दरभंगा से पूरी की। इसके बाद उन्होंने भुवनेश्वर के रीजनल कॉलेज से बीएससी व बीएड किया और फिर देश के नामी संस्थान जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU), दिल्ली से लाइफ साइंस में एमएससी की डिग्री हासिल की है। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने नवोदय विद्यालय और दिल्ली के सरकारी स्कूल में लगभग तीन वर्षों तक शिक्षिका के रूप में सेवाएं दीं हैं।
नौकरी, शादी और मां बनने के साथ तैयारी का संघर्ष
वर्ष 2023 में मुजफ्फरपुर के रहने वाले सरोज कुमार से उनकी शादी हुई। शादी के बाद पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक की नौकरी का रूटीन था। इस बीच उनके घर एक नन्हीं बेटी का आगमन हुआ।
एक 6 महीने की बच्ची की देखभाल, नौकरी और घर संभालने के बावजूद प्रीति ने अफसर बनने के अपने सपने को ओझल नहीं होने दिया। जब BPSC का इंटरव्यू देने का समय आया, तो वे अपनी 6 महीने की बेटी को गोद में लेकर इंटरव्यू बोर्ड के सामने पहुंची थीं।
बदली रणनीति और दूसरे प्रयास में मिली सफलता
प्रीति ने अपने पहले प्रयास में BPSC की प्रारंभिक परीक्षा (PT) तो पास कर ली थी, लेकिन आगे के चरण में वे सफल नहीं हो पाई थीं। इस असफलता से निराश होने के बजाय उन्होंने अपनी रणनीति बदली। शादी और बच्चे के बाद घंटों एक जगह बैठकर पढ़ना आसान नहीं था, इसलिए उन्होंने जब भी समय मिला, तब उन्होंने पूरी एकाग्रता के साथ अपनी कमियों पर काम किया।
प्रीति का मानना है कि परीक्षा की तैयारी में केवल लंबे घंटों तक पढ़ना जरूरी नहीं है, बल्कि निरंतरता और समय का सही उपयोग सबसे महत्वपूर्ण है। उनकी इसी रणनीति और परिवार के अटूट सहयोग के दम पर उन्होंने दूसरे प्रयास में SDM बनकर अपनी सफलता का परचम लहरा दिया।
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